आंदोलन. होल्डिंग टैक्स बढ़ोतरी के विरुद्ध शहरवासी गोलबंद
हजारीबाग : नगर निगम क्षेत्र में सरकार की ओर से होल्डिंग टैक्स में बढ़ोतरी के विरोध में तीन फरवरी को रितिका एजेंसी कार्यालय में तालाबंदी की जायेगी. समाजसेवी प्रदीप प्रसाद के नेतृत्व में शहरवासी तालाबंदी करेंगे. आंदोलन की शुरुआत हजारीबाग केशव हॉल से की जायेगी, जहां से होल्डिंगधारी रैली निकाल कर टैक्स वृद्धि के विरोध में प्रदर्शन करेंगे. रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए जुलू पार्क स्थित होल्डिंग टैक्स वसूली कार्यालय रितिका कंपनी का कार्यालय पहुंचेगी. यहां अनिश्चितकालीन तालाबंदी की जायेगी.
शहरवासियों ने कहा कि जब तक सरकार होल्डिंग टैक्स बढ़ोतरी को वापस नहीं लेती है, कार्यालय में तालाबंदी जारी रहेगी. इसके अलावा होल्डिंगधारियों ने मकान का सर्वे फॉर्म जमा करने की तिथि 31 मार्च तक करने की मांग की है. उनके अनुसार सरकार ने असमान रूप से टैक्स की बढ़ोतरी कर दी है. वहीं सरकारी भवनों का टैक्स घटाया दिया है. शिक्षण संस्थाओं, चिकित्सक के लिए होल्डिंग टैक्स के अपेक्षा कम टैक्स बढ़ाया गया है.
टैक्स का नया दर
होल्डिंग टैक्स की बढ़ोतरी सड़क की चौड़ाई के आधार की गयी है. 40 फीट चौड़ी सड़क के किनारे बने हुए मकान पर 108 रुपया प्रति वर्गफीट होल्डिंग टैक्स बढ़ाया गया है. 20 से 40 फीट चौड़ी सड़क के किनारे बने मकान के लिए 86 रुपया प्रति वर्गफीट, 20 फीट से कम चौड़ी सड़क किनारे बने मकान के लिए 65 रुपया प्रति वर्ग फीट टैक्स निर्धारित है.
पहले होल्डिंग टैक्स की वसूली मकान का 70 प्रतिशत क्षेत्रफल का मूल्यांकन करने के बाद नौ प्रतिशत टैक्स की वसूली होती थी. इसमें होल्डिंग 2.5 प्रतिशत, शौच टैक्स दो प्रतिशत, जल कर दो प्रतिशत, स्वास्थ्य कर 1.2 प्रतिशत शामिल था. अब इसमें बदलाव करते हुए क्षेत्रफल के मूल्यांकन के आधार पर दो प्रतिशत होल्डिंग व संपत्ति टैक्स ली जाती है.
यह हमारे लिए अत्याचार है, नहीं देंगे इतना टैक्स
नगर निगम क्षेत्र में होल्डिंग टैक्स वृद्धि को लेकर आम जनता में नाराजगी है. लोग टैक्स वृद्धि के विरोध में आरपार की लड़ाई का मन बना चुके हैं. सरकार के इस फैसले की चौतरफा निंदा की जा रही है. लोगों की एक ही मांग की है कि सरकार बढ़े हुए होल्डिंग टैक्स बढ़ोतरी के निर्णय को वापस ले.
निगम का निर्णय गलत
जिस तरह से सरकार ने होल्डिंग टैक्स में वृद्धि की है, उस तरह टैक्स वृद्धि का कोई प्रावधान नहीं है. नगर निगम में तीन गुणा से लेकर 12 गुणा तक टैक्स बढ़ाया गया है. वहीं सरकार ने निजी हाथों में टैक्स वसूली का कार्य दे दिया है. नगर निगम के पास अब कोई काम नहीं बच गया है.
इंदुभूषण सिंह, सेवानिवृत्त स अभियंता
यह तुगलकी फरमान
नगर निगम द्वारा साढ़े तीन गुणा टैक्स की वृद्धि तुगलकी फरमान है. वर्तमान में नगर निगम जो सुविधाएं दे रही है, उसके अनुरूप ही टैक्स वृद्धि की जानी चाहिए. बगैर सुविधा किस बात के लिए हम टैक्स दें. सरकार ने जिस तरह का निर्णय लिया है, वह किसी भी हाल में तर्कसंगत नहीं है.
कपिल पंडित, सेवानिवृत्त ऑडिटर
सुविधा तो मिलनी चाहिए
सरकार ने जिस तरह से टैक्स में वृद्धि की है, यह आम लोगों के लिए एक तरह से अत्याचार है. नगर निगम क्षेत्र में नागरिक सुविधा नहीं के बराबर है. निगम में कोई काम नहीं होता है. लोग पानी के लिये दर-दर भटकते हैं, लेकिन यहां की महानगरों की तरह टैक्स लगा दिया गया है.
अजय गोस्वामी, मटवारी
अतिरिक्त बोझ किसी हाल में नहीं करेंगे बरदाश्त
नगर निगम में जितना टैक्स बढ़ाया गया है, उतना टैक्सएक बार में अंगरेजी हुकूमत में भी नहीं बढ़ा था. बगैर किसी कारण टैक्स बढ़ा देना न्याय नहीं है. नगर निगम ने सफाई के लिए एनजीओ को लगाया गया था. अब उसे भी हटा लिया गया. अतिरिक्त बोझ स्वीकार नहीं करेंगे.रामप्रवेश सिंह, मटवारी
