राजकीय इटखोरी महोत्सव में दिखेगा तीन धर्मों का संगम

इटखोरी. राजकीय इटखोरी महोत्सव (19 से 21 फरवरी) में इस साल भी तीन धर्मों (सनातन, बौद्ध व जैन) के पुरातात्विक कलाकृति की अनोखी व अद्भुत झलक दिखेगी. इसको ऐतिहासिक बनाने के लिए हर स्तर से तैयारी चल रही है. मां भद्रकाली के पावन स्थल, भगवान गौतम बुद्ध के शरणस्थली तथा शीतल नाथ जी की जन्मस्थली […]

इटखोरी. राजकीय इटखोरी महोत्सव (19 से 21 फरवरी) में इस साल भी तीन धर्मों (सनातन, बौद्ध व जैन) के पुरातात्विक कलाकृति की अनोखी व अद्भुत झलक दिखेगी. इसको ऐतिहासिक बनाने के लिए हर स्तर से तैयारी चल रही है. मां भद्रकाली के पावन स्थल, भगवान गौतम बुद्ध के शरणस्थली तथा शीतल नाथ जी की जन्मस्थली इटखोरी का इतिहास प्राचीन है. तीन धर्म के संगम स्थल पर इस साल राजकीय इटखोरी महोत्सव का तीसरा साल है. महोत्सव के दौरान अलग-अलग सांस्कृतिक व हस्त कलाअों के माध्यम से क्षेत्र की महत्ता दर्शायी जाती है. यह महोत्सव प्रतिवर्ष अपना यादगार छाप छोड़ जाता है. देश-विदेश से आनेवाले पर्यटक इटखोरी के इतिहास से परिचित होते हैं. महोत्सव के दौरान तीन धर्मों का संगम स्थल के महत्ता से बाहरी पर्यटकों को अक्षरश: समझाया जा सके, इसकी पूरी तैयारी की जा रही है.
क्या है इटखोरी में: इटखोरी में सनातन धर्म को मानने वालों के लिए मां भद्रकाली, सहस्त्र शिवलिंगम समेत अन्य प्रतिमाएं हैं. बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए बौद्ध स्तूप, मनौती स्तूप समेत पैनल में उत्कीर्ण प्रतिमाएं हैं. जैन धर्म के 10वें तीर्थंकर भगवान शीतल नाथ जी का चरण पादुका है. परिसर के तीन दिशाअों में उत्तरवाहिनी मोहाने नदी गुजरी है.
इ-वोलेट से दे सकते है दान: मां भद्रकाली मंदिर प्रबंधन समिति ने दान के लिए अलग व्यवस्था की है. इ-वोलेट, पेटीएम समेत अन्य आधुनिक तकनीक से श्रद्धालु दान दे सकते हैं.
इटखोरी से विजय कुमार की रिपोर्ट

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