मतदाता ही देते थे चुनाव लड़ने का खर्च यादेंफोटो- जोरी 1 में पूर्व मुखिया पारसनाथ सिंहजोरी़ तेतरिया पंचायत के पूर्व मुखिया पारसनाथ सिंह ने कहा कि पहले के चुनाव में लोग प्रतिष्ठित व ईमानदार व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि चुनते थे़ नामांकन शुल्क व परचा छपवाने का खर्च भी मतदाता ही देते थे़ चुनाव प्रचार भी प्रतिद्वंदी के साथ मिल कर करते थे़ मतदाता भी बिना लोभ लालच के निर्भीक होकर मतदान करते थे़ चुने गये प्रतिनिधि भी ईमानदारी से गांवों का विकास करते थे, लेकिनआज के चुनाव में काफी बदलाव आ गया है़ जनता का कोई काम बिना पैसा का नहीं होता है़ मतदाता भी बिकाऊ हो गये हैं. चुनाव में पैसा व बाहुबल हावी हो गया है. लोगों से डरा-धमका कर वोट मांगा जा रहा है़ श्री सिंह 1963 में पहली बार मुखिया बने थे़
मतदाता ही देते थे चुनाव लड़ने का खर्च
मतदाता ही देते थे चुनाव लड़ने का खर्च यादेंफोटो- जोरी 1 में पूर्व मुखिया पारसनाथ सिंहजोरी़ तेतरिया पंचायत के पूर्व मुखिया पारसनाथ सिंह ने कहा कि पहले के चुनाव में लोग प्रतिष्ठित व ईमानदार व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि चुनते थे़ नामांकन शुल्क व परचा छपवाने का खर्च भी मतदाता ही देते थे़ चुनाव प्रचार भी […]
