दारू-मुरगा का अड्डा बना केरेडारी का हाट- बाजार

केरेडारी. प्रखंड में शराब बनाने का अवैध धंधा जोरों से चल रहा है. पुलिस की लापरवाही से शराब का अवैध धंधा फल-फूल रहा है. केरेडारी प्रखंड में हजारों लीटर महुआ का शराब प्रतिदिन बनाया जाता है. जिसका बुरा प्रभाव प्रखंड के बच्चे, युवा से लेकर बुजुर्ग तक पर पड़ रहा है. लोग नशे की आदी […]

केरेडारी. प्रखंड में शराब बनाने का अवैध धंधा जोरों से चल रहा है. पुलिस की लापरवाही से शराब का अवैध धंधा फल-फूल रहा है. केरेडारी प्रखंड में हजारों लीटर महुआ का शराब प्रतिदिन बनाया जाता है. जिसका बुरा प्रभाव प्रखंड के बच्चे, युवा से लेकर बुजुर्ग तक पर पड़ रहा है. लोग नशे की आदी होते जा रहे हैं. युवा वर्ग दिन-रात शराब के नशे में डूबे रहते हैं. जिससे समाज व घर-परिवार पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. नशाखोरी के कारण हमेशा पारिवारिक विवाद, मारपीट, हत्या, महिला प्रताड़ना की घटना घटते रहती है. इसका सबसे असर दैनिक मजदूरों पर देखने को मिल रहा है, जो रोज कमाते हैं तो खाते हंै. जिस दिन नहीं कमाते उस दिन घर पर चूल्हा तक नहीं जलता. शराब के लत के कारण वे कर्ज में डूबते जाते हंै. कहां-कहां बेचा जाता है महुआ शराब : शराब की बिक्री टंडवा से केरेडारी व हजारीबाग के सड़क के किनारे बने लाइन होटल, गर्रीकला, बेल चौक, कोदवे चौक पर ज्यादा होती है. बाजारों तो मानो दारू और मुरगा का अड्डा बन गया है. सब्जी से ज्यादा शराब दुकान नजर आते हैं. पतरा बाजार, केरेडारी के बंगला टांड़ बाजार, टंडवा बाजार में खुले आम शराब बेचा जाता है, पर पुलिस तमाशबीन बनी है. बाजार में जाने वाले लोग शराबियों के अभद्र व्यवहार से परेशान हैं. गण्यमान्य लोगों को हाट जाना मुश्किल हो जाता है. अंग्रेजी शराब विक्रेता भी चांदी काट रहे हैं. लाइसेंस धारी शराब विक्रेता शराब की बिक्री प्रिंट के अनुसार नहीं करते. 60 रुपये का बियर या शराब 100 से 120 रुपये तक बेचा जाता है. ग्रामीणों ने शराब चुलाई पर अंकुश लगाने की मांग जिला व पुलिस प्रशासन की है.

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