तीन करोड़ 91 लाख 81 हजार रुपये का राजस्व सरकार को प्राप्त हुआ
वर्ष 2020 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत लगी
हजारीबाग : व्यवहार न्यायालय स्थित न्याय सदन भवन में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत लगी. झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर इसका आयोजन किया गया. उदघाटन प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश सह विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद ने अपने न्यायिक पदाधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से किया.
इसमें अलग अलग प्रकार के 438 सुलहनीय आपराधिक एवं दीवानी मुकदमों का निबटारा किया गया. राष्ट्रीय लोक अदालत से सरकारी खजाने में तीन करोड़ 91 लाख 81254 रुपये का राजस्व जमा हुआ.
इसके साथ-साथ वाहन दुर्घटना न्यायधिकरण के 30 वादों के पीड़ितों के बीच दो करोड़ 11 लाख, 25 हजार 29 रुपये का वितरण किया गया. जिला जज ने कहा कि लोक अदालत त्वरित और बिना खर्च के न्याय पाने का सबसे आसान तरीका है. इस व्यवस्था का सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार प्रसार करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि मुकदमा लड़ना किसी के लिए अच्छी बात नहीं है.
आपसी संवाद और समझौते के माध्यम से विवाद का निबटारा हो. यह समाज के लिए बेहतर है. राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री लिटिगेशन के सैकड़ों मामले सलटाये गये. प्राधिकार के सचिव संदीप निशिथ बाड़ा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए 10 बेंच बनाये गये थे. सभी बेचों में एक न्यायिक पदाधिकारी, दो न्यायालय कर्मी और एक अधिवक्ता की सेवा ली गयी है.
लोक अदालत को सफल बनाने में फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सुनील कुमार सिंह, अशोक कुमार, रमेश कुमार, यशवंत प्रकाश, केके झा, संजय कुमार सिंह, अमित शेखर, योगेश कुमार, गति कृष्ण तिवारी, ऋचा श्रीवास्तव, पार्थ सारथी घोष, प्रदीप कुमार, एनआर लकड़ा,सौदामिनी सिंह, के टोप्पो, एसएस मिंज, रीमा कुमारी के अलावा बार एसोसिएशन के सचिव, अधिवक्ता हीरालाल समेत काफी संख्या में वादकारी व न्यायालय कर्मी शिरकत की.
