हजारीबाग : झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 के सभी मतदान केंद्रों पर वोटर वेरिफिकेशन पेपर ऑडिट ट्रेल वीवीपैट का उपयोग होगा. जिला प्रशासन इसकी जागरूकता के लिए व्यापक रूप से प्रचार प्रसार कर रहा है.
सभी प्रखंडों में मास्टर ट्रेनर बीडीओ और सीओ की निगरानी में पंचायतों में वीवीपैट रखकर लोगों को इसके बारे में बताया गया. यह जानकारी वीवीपैट प्रशिक्षण के नोडल पदाधिकारी राकेश रंजन ने प्रेस वार्ता में दी. उन्होंने कहा कि जिले के 1768 बूथों के पीठासीन पदाधिकारी, पोलिंग पार्टी वन, पोलिंग पार्टी टू को वीपीपैट का प्रशिक्षण दिया गया.
कैसे काम करता है वीवीपैट : वीवीपैट मतदाता मत प्रणाली के फीडबैक देने का एक तरीका है. जिसमें वोटर अपने पंसदीदा उम्मीदवार को इवीएम मशीन पर बटन दबाने के साथ ही वीवीपैट पर अभ्यर्थी के नाम, चुनाव चिह्न, विधानसभा क्षेत्र स्क्रीन पर दिखता है. यह करीब सात मिनट तक वीवीपैट स्क्रीन पर रहता है. वीवीपैट से एक परची कटकर नीचे गिरता है जिसमें दिये गये मतदान का चुनाव चिह्न अंकित होता है. जो मतगणना में ऑडिट करने में सहयोग करता है.
संतुष्ट नहीं होने पर मतदाता दावा कर सकते हैं : नोडल पदाधिकारी ने बताया कि चुनाव के दौरान मतदाता को आशंका हो कि उसका वोट किसी दूसरे अभ्यर्थी को गया है, तो इस पर मतदाता दावा कर सकते हैं. मतदाता 49 एमए नियम के तहत पीठासीन पदाधिकारी से इसकी शिकायत कर सकते हैं. इसके बाद पीठासीन पदाधिकारी डिक्लियरेशन फार्म भरकर पुन: मॉक पॉल करवा सकते हैं.
यदि मतदाता का दावा सही होता है, तो मतदान रोक दिया जायेगा. मतदाता का दावा गलत होने पर छह माह के कारावास या एक हजार रूपये का आर्थिक दंड अथवा दोनों सजा हो सकती है. मौके पर सहायक नोडल पदाधिकारी धीरज कुमार सहित कई लोग शामिल थे.
