बड़कागांव : हजारीबाग जिला पुलिस के दबाव में अपहरणकर्ताओं ने अपहृत भवानी प्रसाद महतो (पिता सोमर महतो), मुंशी दिनेश महतो को 26 घंटे बाद मुक्त कर दिया. इन्हें 11 जून को रात 12 बजे फतहा के रजहर जंगल से मुक्त किया गया.
कैसे हुआ अपहरण : भुक्तभोगी ईंट भट्ठा मालिक भवानी प्रसाद दांगी तथा मुंशी दिनेश महतो ने बताया कि 10 जून को महुदी के चिमनी ईंट भट्ठा में हमारे मजदूर काम कर रहे थे. मैं और मेरा मुंशी कार्यालय में बैठ कर खाना खा रहे थे. उसी समय चार-पांच की संख्या में अपराधी संगठन के लोग पहुंच गये और हमें पकड़ लिया. हमारे मजदूरों के साथ भी मारपीट की गयी. हम दोनों को अपराधियों ने आंख में पट्टी बांध दिया और हाथ को पीछे पीठ की ओर बांध दिया. उसके बाद हम दोनों को जंगल की ओर ले गये. अपराधी किस दिशा की ओर हमें ले जा रहे थे इसका पता नहीं चल रहा था. क्योंकि हमारे आंख में पट्टी बंधा हुआ था.
लेकिन चलते-चलते एक नदी मिला था. इसके बाद हमलोग को जंगल की ओर ले जाया जा रहा था. इस दौरान हमलोग कई बार गिरते-गिरते बचे. घनघोर जंगल में हम दोनों को पट्टी खोल दिया गया. उसके बाद हमलोग सो गये. सुबह होने पर अपहरणकर्ताओं ने हमलोगों को फोन नहीं उठाने को लेकर काफी डांट-डपट किया. 12 बजे दिन में पत्तल में दाल, भात और आलू खाने के लिए दिया गया. इसके बाद हम दोनों के आंख पर पट्टी बांध कर अपराधियों ने जंगल में खूब घुमाया. 12 बजे रात में फतहा क्षेत्र के जंगलों में छोड़ दिया गया. आंखों से पट्टी खोल दी गयी. हम दोनों को पता नहीं चल पाया कि हमें किस जंगल से लाया गया.
पुलिस के दबाव में छोड़ा : हजारीबाग डीएसपी हीरालाल रवि ने बताया कि अपहरण मामले को लेकर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी. इसके आधार पर हमलोगों ने छानबीन करना शुरू कर दिया था. महुदी तथा फतहा क्षेत्र के जंगलों को चारों तरफ से पुलिस घेर लिया था. दबाव के कारण अपहरणकर्ताओं ने इन्हें रजहर जंगल के आसपास के क्षेत्र में छोड़ दिया. डीएसपी ने यह भी बताया कि अब तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है कि किस संगठन ने इन दोनों का अपहरण किया था.
