इसी के आधार पर सत्याग्रह का महत्व रूस के बोल्शेविक क्रांति के साथ-साथ चीन एवं क्यूबा की क्रांतियों से समझ सकते हैं. चंपारण सत्याग्रह अहिंसा आधारित किसानों के हित में किया गया संघर्ष था. उन्होंने कहा कि 1919 का असहयोग आंदोलन, 1932 का सविनय अवज्ञा आंदोलन और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन चंपारण सत्याग्रह का वृहद रूप है. प्रतिकुलपति डॉ कुनुल कंडीर ने कहा कि नयी पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से अवगत कराने की जरूरत है. आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी का योगदान अमिट है.
कुल सचिव बंशीधर रूखैयार ने चंपारण सत्याग्रह के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. डॉ वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने भी इस सत्याग्रह से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें रखीं. स्वागत भाषण इतिहास विभागाध्यध्यक्ष डॉ पीसी राय ने दिया. मंच संचालन डॉ चंद्रशेखर सिंह ने किया. कार्यक्रम में कुलसचिव बंशीधर रूखैयार, परीक्षा नियंत्रक वीरेंद्र कुमार गुप्ता उपस्थित हुए. संगोष्ठी के दूसरे सत्र में विद्वानों द्वारा 87 आलेख पढ़े गये. सभी प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र का वितरण किया गया.
