हजारीबाग: प्रशिक्षु आइएएस गरिमा सिंह ने कहा है कि कुपोषण को दूर करना उनकी प्राथमिकता होगी. झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग कारणों से कुपोषण से लोग पीड़ित हैं. वह एएसपी लखनऊ और सीटी एसपी झांसी के पद पर भी रह चुकी हैं.
यूपीएससी की परीक्षा में पुन: आइएएस कैडर मिलने के बाद एक वर्ष के प्रशिक्षण के लिए वह हजारीबाग में कार्यरत हैं. गरिमा सिंह ने यूपीएससी में दो बार सफल होने व प्राथमिकता व अनुभव पर प्रभात खबर से बातचीत की. गरिमा सिंह 2012 में यूपीएससी में सफल होकर आइपीएस बनीं. 2016 में पुन: सफलता हासिल कर आइएएस बनी हैं. वह नोएडा की रहनेवाली हैं.
आइएएस गरिमा सिंह ने कहा कि इंटरनेट से विद्यार्थी और युवाओं को अब अलग नहीं कर सकते हैं. 21वीं सदी में इंटरनेट का सही इस्तेमाल, फायदा व नुकसान के लिए जागरूक करने की जरूरत है. झारखंड और हजारीबाग में पर्यावरण का विशेष महत्व है. जंगलों से घिरे क्षेत्र को बरकरार रखने की जरूरत है. हजारीबाग के मौसम व हरियाली से प्रभावित हूं. गरिमा ने बताया कि मेरी पढाई 12वीं तक जीव विज्ञान विषय में हुई.
मेडिकल में जाने की इच्छा उस वक्त तक बरकरार थी, लेकिन अभिभावकों के मार्गदर्शन के बाद यूपीएससी की तैयारी की. डीसी के रूप में स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष काम करने की उनकी इच्छा है. सरकार की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं. नियमित निरीक्षण वह अधिकारियों को करने का निर्देश देंगी. चिकित्सक रोगियों के साथ बेहतर व्यवहार करे, यह व्यवस्था बनाना उनका प्रयास होगा. उन्होंने बताया कि महिलाओं को जागरूक करना होगा. हर अभिभावक अपने बच्चियों को बेहतर शिक्षा दें, तभी उनमें आत्मविश्वास जगेगा.
यूपीएससी की तैयारी करनेवाले विद्यार्थियों से कहा कि मेहनत से ही सफलता मिलेगी. प्रशिक्षु आइएएस जिले के सभी विभागों में प्रशिक्षण ले रही हैं. इनका प्रशिक्षण का कार्यकाल मई 2018 तक रहेगा.
