चतरा" जिले में भाकपा माओवादी की बंदी असरदार रही. लंबी दूरी के एक भी वाहन नहीं चले, सड़कें वीरान रही. वाहन नहीं चलने से यात्रियों को परेशानी हुई. बंदी से चौक-चौराहों पर सन्नाटा पसरा रहा. साप्ताहिक हाटों में व्यापारी नहीं पहुंचे. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. आम्रपाली, मगध कोल परियोजना में कोयला का डिस्पैच व उत्खनन कार्य ठप रहे.
बंदी का असर पिपरवार, अशोका परियोजना पर भी देखे गये. सीसीएल को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. लावालौंग, कुंदा, हंटरगंज, कान्हाचट्टी में बंद का व्यापक असर देखा गया. इस दौरान कई जगहों पर पुलिस गश्त लगाती रही. ग्रामीण क्षेत्रों में भी छोटे, बड़े वाहन नहीं चले. लोग पैदल चलकर गंतव्य स्थान पर पहुंचे. टंडवा, सिमरिया, पत्थलगड्डा, गिद्धौर, मयूरहंड, इटखोरी में भी बंद का असर देखा गया. कई जगहों पर दुकान भी नहीं खुली. मालूम हो कि माओवादी 28 जुलाई से तीन अगस्त तक शहादत दिवस मना रहे थे. शहादत दिवस के अंतिम दिन बंद किया. समाचार लिखे जाने तक कही से कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.
कुंदा. कुंदा में माओवादी बंदी असरदार रही. वाहनों का परिचालन ठप रहा. सड़कों पर छोटे वाहन चलते दिखायी दिये. बंदी को लेकर पुलिस व सीआरपीएफ जवानों ने कई गांवों में माओवादियों के खिलाफ सर्च अभियान चलाया. बंदी से चौक-चौराहों पर सन्नाटा पसरा रहा. एसबीआइ शाखा नहीं खुली, जिससे ग्राहक वापस लौट गये.
