गुमला: साहब, इन ध्वस्त और क्षतिग्रस्त पुलों के कारण दर्जनों गांवों के लोग मुसीबत में हैं. ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर ये पुल कब बनेंगे. जिले में कोई पुल दो साल पहले ध्वस्त हुआ, तो कोई वर्ष 2017 से क्षतिग्रस्त है. इसके बावजूद अब तक इनकी मरम्मत या नवनिर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है. इससे इन पुलों से आवागमन करने वाले ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है.
बरसात के मौसम में समस्या और गंभीर हो गयी है. कई गांवों का संपर्क प्रभावित है. बारिश नहीं होने और नदी का जलस्तर कम रहने पर लोग किसी तरह आवागमन कर लेते हैं, लेकिन जलस्तर बढ़ने पर परेशानी बढ़ जाती है. कई जगह ग्रामीण क्षतिग्रस्त पुलों के ऊपर से जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं.
सिसई : दो करोड़ का पुल दो साल पहले ध्वस्त, अब तक नहीं बनी
सिसई प्रखंड के डड़हा-छारदा पथ में जैरा स्थित कंस नदी पर बना ग्रामीण पुल करीब दो वर्ष पहले ध्वस्त हो गया था. अब तक इसकी मरम्मत नहीं हुई है. करीब दो करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2007-08 में बने इस पुल से लोहरदगा जिले को डड़हा गांव स्थित एनएच से जोड़ा जाता है.
पुल के ध्वस्त होने से डड़हा से होकर लोहरदगा जाने वाले लोगों के अलावा जैरा, करकरी, बघनी, बुड़का, छारदा, बरंदा, पहामु, भुरसो समेत दर्जनों गांवों के लोग प्रभावित हैं. ग्रामीणों को आवागमन के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है.
बिशुनपुर : क्षतिग्रस्त पुलिया से 130 परिवार प्रभावित
बिशुनपुर प्रखंड के नक्सल प्रभावित रहे कुमारी गांव में महादेव टोंगरी के पास वर्षों पहले बनी पुलिया करीब एक वर्ष से क्षतिग्रस्त है. इससे कुमारी गांव के करीब 80 और गोताख गांव के करीब 50 परिवार प्रभावित हैं.
पुलिया जर्जर होने के कारण ग्रामीण लकड़ी के सहारे इसे पार करने को मजबूर हैं. ग्रामीण रतनलाल उरांव ने बताया कि बीते वर्ष बारिश के दौरान पुलिया क्षतिग्रस्त हुई थी. अब तक इसका निर्माण नहीं कराया गया है. बरसात में पुलिया के नीचे पानी का बहाव बढ़ जाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
ग्रामीणों ने प्रखंड प्रमुख राजलक्ष्मी उरांव और राजू भगत से मिलकर पुलिया के निर्माण की मांग भी रखी है.
रायडीह : 2017 में धंसा था पुल का पिलर, 50 गांवों का आवागमन प्रभावित
रायडीह प्रखंड में शंख नदी पर बना मरियम टोली पुल वर्ष 2017 में बाढ़ और तेज पानी के बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था. पुल का पिलर धंसने के बाद से अब तक इसकी मरम्मत नहीं हुई है. इसके बावजूद करीब 50 गांवों के लोग इसी जर्जर पुल से आवागमन कर रहे हैं.
प्रशासन की ओर से पुल के दोनों छोर पर बोर्ड लगाया गया है, जिसमें इस पुल से आवागमन नहीं करने की चेतावनी दी गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी संख्या में गांवों के लिए यही मुख्य आवागमन का रास्ता है. इसलिए मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर पुल पार करते हैं.
इस पुल का निर्माण विशेष प्रमंडल गुमला की ओर से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था.
पालकोट : टूटे पुल से स्कूल जा रहे सैकड़ों छात्र-छात्राएं
पालकोट प्रखंड मुख्यालय के बाजारटांड़ से कुल्लूकेरा और झीकीरीमा पंचायत जाने वाली सड़क पर पहान टोली गांव के पास छोटका बाघलता स्थित पुल भी क्षतिग्रस्त है. पुल टूटने के कारण ग्रामीणों के साथ छात्र-छात्राओं को भी परेशानी हो रही है.
इसी रास्ते से पाकर टोली, कुरा, चोरडाड़, पानी सानी, पुटकल टोली, कुल्लूकेरा, मुराई टोली, डुमरटोली, भुसड़ी टोली और सारूबेड़ा के लोग आवागमन करते हैं. कंदर्प उच्च विद्यालय, मध्य विद्यालय, संत जोसेफ उच्च विद्यालय करौंदाबेड़ा और संत मारिया उच्च विद्यालय जाने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं भी प्रतिदिन इसी रास्ते से गुजरते हैं.
बरसात के दिनों में पुल की स्थिति और खतरनाक हो जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण जल्द नहीं कराया गया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता.
