: सदर प्रखंड अंतर्गत फोरी पंचायत के जुंगाटोली पेयजल, सड़क व नदी पर पुल का अभाव. : गांव की समस्याओं को ले ग्रामीण मुखर, चुनाव में वोट बहिष्कार करने का निर्णय लिया.
जगरनाथ पासवान, गुमला
गर्मी का मौसम ऐसा कि पानी को तरसते हैं और बरसात में नदी में पानी भर जाने के बाद अपने ही गांव में कैद होकर रहना पड़ता है. गांव में लोगों के चलने के लिए सड़क तक नहीं है. यह समस्या सदर प्रखंड अंतर्गत फोरी पंचायत के जुंगाटोली की है. गांव की सबसे बड़ी समस्या पेयजल, सड़क और नदी पर पुल का अभाव है. इस गांव में पेयजल के मामले में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि पेयजल के लिए सरकारी योजना से किये गये काम भी में ग्रामीणों से 200 से लेकर 500 रुपए तक की वसूली की गयी है. लेकिन गांव के लोगों का दुर्भाग्य ही है कि सरकारी योजना से हो रहे काम में पैसे लगाने के बाद भी पानी नसीब नहीं है. जुंगाटोली में कुल छह चापानल हैं. जिसमें से चार खराब है. बाकी बचे दो चापानल में से एक चापानल को जलमीनार से कनेक्ट किया गया है. ग्रामीणों के अनुसार जलमीनार का काम होने के समय में कई लोगों से 200 से 500 रुपए लिया गया. जलमीनार तो बन गयी. लेकिन जलमीनार से एक बूंद भी पानी नहीं मिल सका है. वहीं गांव में ग्रामीणों के चलने के लिए सड़क तो है ही नहीं. इसके साथ ही गांव के लोगों को प्रखंड व जिला मुख्यालय से जुड़ने वाली सड़क के बीच में खटवा नदी है. लेकिन आजादी के दशकों बाद भी नदी में पुल नहीं बनाया जा सका है. बरसात के दिनों में गांव के लोगों को मुख्यालय से जुड़ने के लिए या तो नदी में तैरकर पार होने का जोखिम उठाना पड़ता है या तो मोकरो, फोरी, नकटी व कुंबाटोली होते हुए जाना पड़ता है. गांव की इन दो प्रमुख समस्याओं को लेकर गांव के ग्रामीण मुखर हैं. आगामी चुनाव में ग्रामीण वोट बहिष्कार करने का निर्णय लिये हैं.
सड़क के अभाव में काफी परेशानी उठानी पड़ती है : देवकी एक्काग्रामीण महिला देवकी एक्का ने बताया कि हमारे गांव में सड़क नहीं होने के कारण बीमार लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है. गर्भावस्था के दौरान टोटो तक लगभग चार किमी पैदल चलकर मैं अस्पताल पहुंची थी. जहां मैंने अपने बेटे शैलेश मिंज को जन्म दिया था. आज भी गांव में चलने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही पीने के लिये पेयजल की समुचित सुविधा है.
लोग अपनी बेटी हमारे गांव में नहीं ब्याहते : समरईत देवी
समरईत देवी ने बताया कि गांव में सड़क नहीं होने के कारण लोग अपनी बेटी गांव में नहीं देते हैं. अगुवा आता तो है. लेकिन गांव की बदहाली देखकर अपनी बेटी ब्याहने से मना कर देता है. अव्यवस्था का आलम तो यह है कि सुबह पीने का पानी जुटाने के लिए भी दो से तीन किमी तक दौड़ लगानी पड़ती है. अगर कोई बीमार पड़ गया तो उसे भगवान भरोसे छोड़ देना पड़ता है. गर्मी में पानी लाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है : हरियाली देवीआंगनबाड़ी सहायिका हरियाली देवी ने बताया कि बरसात के दिनों में लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो जाता है. हमारे टोला में न तो पानी की उचित व्यवस्था है और न ही सड़क की. गर्मी के दिनों में हमें पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है. बरसात के दिनों में तो हमें घर से निकलने में भी परेशानी होती है.
अब के विधायक-सांसद आश्वास देते हैं : पवन मिंज
पवन मिंज ने बताया कि स्थानीय मुखिया, विधायक, सांसद व तमाम जनप्रतिनिधियों द्वारा अब तक हमें केवल आश्वासन ही दिया गया है. जिला मुख्यालय से इतने नजदीक होने के बाद भी हमें हर सुविधाओं से वंचित रखा गया है. गांव में न तो सड़क बनी है और न ही पेयजल की सुविधा है. काफी प्रयास के बाद भूतपूर्व सांसद सुदर्शन भगत द्वारा हमारे टोला में महज 500 मीटर सड़क का निर्माण कराया गया था, जो भी अब जर्जर हो रहा है. सरकार समस्या दूर करें या हमारी नागरिकता समाप्त कर दे : महावीरमहावीर उरांव ने कहा कि विधायक, सांसद सहित सभी आला अधिकारियों को बार-बार गांव की समस्या से अवगत कराने के बाद भी हमारे गांव का विकास नहीं हो पाया है. एंबुलेंस को फोन करने पर एंबुलेंस नहीं आती है. गांव की बदहाली के कारण गांव से बारात नहीं जाती है. बरसात के दिनों में तो चार महीने तक बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते. ऐसे में या तो सरकार हमारी समस्याओं का समाधान ढूंढ़े या हमारी नागरिकता ही समाप्त कर दें.
आगामी चुनाव में वोट का बहिष्कार करेंगे : जिरगी मिंज
जिरगी मिंज ने बताया कि गांव की हालत काफी दयनीय है. गांव में अभी तक सामुदायिक भवन का भी निर्माण नहीं हुआ है. जिस कारण काफी परेशानी उठानी पड़ती है. गांव में आंगनबाड़ी केंद्र बन रहा है. जिसका उदघाटन तक नहीं हुआ है. गांव में अनेकों समस्या है. लेकिन सरकार हमसे केवल वोट मांगने आती है, सुविधाएं देने नहीं. आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार करेंगे. सड़क व पुल बनने से गांव का विकास होगा : प्रदीप उरांवप्रदीप उरांव ने बताया कि बरसात के दिनों में लोगों को समुचित स्वास्थ्य का लाभ नहीं मिल पाता है. चार महीनों तक बच्चे भी विद्यालय नहीं जा पाते हैं. जिस कारण उनका पढ़ाई-लिखाई सब चौपट हो जाता है. जुंगाटोली के खटवा नदी पर पुल व सड़क निर्माण हो जाने से लोगों को जिला मुख्यालय से जुड़ने में छह किमी की दूरी कम पड़ेगी. सड़क व पुल बनने से गांव का विकास होगा.
सरकार और प्रशासन हमारे गांव में भी ध्यान दें : मनीष उरांव
मनीष उरांव ने बताया कि हमारे बगल से ही भारत माला परियोजना गुजर रही है. सरकार और प्रशासन जरा सा ध्यान हमारे पंचायत की ओर भी दे दें तो हम पंचायतवासियों का भी सर्वांगीण विकास हो जाये. बरसात के दिनों में हमारे गांव में पैदल चलना काफी कठिन हो जाता है, गांव में पंचायत भवन तक जाने के लिये भी रास्ता नहीं है. विधायक, नेता केवल वोट मांगने हमारे गांव तक आते हैं, समस्याओं का समाधान करने नहीं.