Gumla POCSO Court, गुमला, (दुर्जय पासवान की रिपोर्ट): न्याय मिलने में देरी भले ही हुई, लेकिन अंततः कानून ने अपना काम कर दिखाया. गुमला के विशेष पोक्सो न्यायालय (एडीजे-1) के न्यायाधीश प्रेम शंकर की अदालत ने बुधवार को वर्ष 2017 के एक चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में अहम फैसला सुनाया. अदालत ने घटना के समय नाबालिग रहे एक आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है. जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे छह महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी.
9 साल का लंबा ट्रायल और आरोपियों की घेराबंदी
इस जघन्य मामले की सुनवाई पिछले नौ वर्षों से चल रही थी. घटना में कुल सात युवक शामिल थे, जिनमें से छह बालिग आरोपियों को अदालत ने पहले ही सजा सुना दी थी. सजा पाने वाला सातवां आरोपी घटना के समय नाबालिग था, जिसे बाल सुधार गृह भेजा गया था. वहां से जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया और कभी न्यायालय की प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ. हालांकि, उसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक होने के बाद अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनवाई पूरी की और उसे दोषी पाया.
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मेले की खुशी को दरिंदगी में बदला था
यह मामला साल 2017 का है, जब दो सहेलियां गांव में मेला देखकर लौट रही थीं. रास्ते में आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और सुनसान जगह पर ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया. आरोपियों ने बच्चियों को डराया-धमकाया और जान से मारने की धमकी भी दी थी. जब पीड़ित बच्चियों ने घर पहुंचकर परिजनों को अपनी आपबीती सुनाई, तब मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई. लोक अभियोजक अजय रजक ने सरकार की ओर से मजबूती के साथ पक्ष रखा और अदालत को बताया कि आरोपी ने न केवल दुष्कर्म किया, बल्कि चोरी (धारा 379) की वारदात को भी अंजाम दिया था.
