गुमला से जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट
Venomous Snakes in Gumla, गुमला: मानसून (बरसात का मौसम) शुरू होते ही गुमला जिले में सांपों का खतरा काफी बढ़ गया है. लगातार हो रही बारिश के कारण जब सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, तो वे सुरक्षित ठिकानों की तलाश में बाहर आ जाते हैं. इस दौरान रेंगते हुए सांप अक्सर खुली सड़कों, खेत-खलिहानों, झाड़ियों और घरों के आसपास दीवारों के किनारे पहुंच जाते हैं. वन विभाग के अनुसार, गुमला जिले में एक दर्जन से भी अधिक सांपों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 5 प्रजातियां सबसे ज्यादा जहरीली और जानलेवा हैं. आइए जानते हैं इनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें और बचाव के उपाय.
गुमला के 5 सबसे जहरीले सांप, 3 से रहें सावधान
वन विभाग गुमला से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गुमला जिले में पाए जाने वाले सांपों में पांच प्रजातियां अत्यधिक जहरीली हैं.
- कॉमन इंडियन करैत (Common Indian Krait): यह छोटी प्रजाति का होता है, लेकिन इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक (बेहद खतरनाक) होता है. यह इसलिए भी ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि चुपचाप इंसान के बेड तक पहुंच जाते हैं और सोते हुए इंसान को काट लेते हैं. कहा जाता है कि इन्हें इंसानों की गर्मा बहुत पंसद है.
- रसल वाइपर (Russell’s Viper): इसे स्थानीय स्तर पर ‘ग्रीन पीट’ के नाम से भी जाना जाता है. यह बेहद आक्रामक होता है.
- स्पैक्टेकल कोबरा (Spectacled Cobra/गेहूंअन): इसके फन पर चश्मे जैसी दो धारी बनी रहती है.
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती तीन सांपों (करैत, रसल वाइपर और कोबरा) से लोगों को सबसे ज्यादा बचने की जरूरत है क्योंकि ये पलक झपकते ही इंसान को मौत की नींद सुला सकते हैं. इसके विपरीत धामिन (धमना), रॉक पाइथन (अजगर), कॉमन सैंड बोआ, ढोंढ़ सांप और कॉपर ट्रिकेट जैसी प्रजातियां जहरीली नहीं होती हैं.
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तिकोन सिर वाले सांप होते हैं जहरीले, ऐसे करें तुरंत पहचान
सांप जहरीला है या नहीं, इसे आम लोग भी एक आसान ट्रिक से पहचान सकते हैं. आमतौर पर जहरीले सांप का सिर हमेशा तिकोना (Triangular) होता है. इसके अलावा, ज्यादातर जहरीले सांपों के चेहरे पर एक छोटा सा छिद्र (Pit) होता है, जिसके माध्यम से वे अपने जहर और तापमान को नियंत्रित करते हैं और दुश्मन पर हमला करते हैं.
बिना जहर वाला सांप
सिविल सर्जन ने अपील ने अपील की है कि सर्पदंश पर झाड़-फूंक नहीं, बल्कि सीधे अस्पताल जाएं. उन्होंने जिले में बढ़ रहे सर्पदंश के मामलों पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि जिले में अब तक कई लोग सांप काटने से अपनी जान गंवा चुके हैं और इनमें से अधिकांश घटनाएं ग्रामीण इलाकों में हुई हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सांप काटने के बाद ओझा-गुनी के चक्कर में पड़कर झाड़-फूंक कराने लगते हैं. इस अंधविश्वास के कारण समय बर्बाद होता है और जहर पूरे शरीर में फैल जाता है, जिससे मरीज की मौत हो जाती है. सीएस ने स्पष्ट कहा है कि गुमला सदर अस्पताल और सभी स्वास्थ्य केंद्रों में सांप काटने की दवा (Anti-Snake Venom) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए पीड़ित को बिना समय गंवाए सीधे अस्पताल लाएं.
न छेड़ें तो किसानों के ‘सच्चे दोस्त’ हैं सांप
सांप को अगर कोई उकसाए या छेड़े, तभी वह आत्मरक्षा में उग्र होकर सामने वाले को डंसता है. अगर सांप को छेड़ा न जाए, तो वह किसानों का सबसे अच्छा मित्र है. खेतों में चूहे और कई कीट-पतंगे फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. लेकिन जिस खेत में सांप होते हैं, वहां चूहे और नुकसान पहुंचाने वाले जीव डर के मारे नहीं आते, क्योंकि सांप उनका शिकार कर लेते हैं. इस तरह सांप प्राकृतिक रूप से फसलों की रक्षा करते हैं.
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