आवास निर्माण पर रोक से परेशान तुरी परिवार, न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

चार पीढ़ियों से रह रहे परिवार ने लगाया बेदखली का आरोप, सीओ कार्यालय के बाहर आत्मदाह की दी चेतावनी

गुमला. रायडीह प्रखंड के कोब्जा टेढ़ाचुआ गांव का तुरी परिवार न्याय पाने के लिए दर-दर भटकने को विवश है. टेढ़ाचुआ निवासी कलेश तुरी, बहुर तुरी और कमलेश तुरी के नाम पर अबुआ आवास और पीएम आवास योजना स्वीकृत हुई है. तीनों लाभुकों के आवास निर्माण का कार्य प्लिंथ लेवल तक पूरा हो चुका है, लेकिन गांव के कुछ लोगों द्वारा जबरन निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गयी. मामला एसडीओ गुमला तक पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद एसडीओ ने कलेश तुरी के पक्ष में फैसला सुनाया. इसके बाद कलेश तुरी, बहुर तुरी और कमलेश तुरी ने आवास निर्माण कार्य शुरू कराने को लेकर रायडीह सीओ को आवेदन दिया. लाभुकों का आरोप है कि सीओ उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. उनका कहना है कि सीओ उनसे मिलने तक को तैयार नहीं हैं और कार्यालय के कर्मचारी भी उनके साथ अभद्र व्यवहार कर उन्हें भगा देते हैं. इससे विपक्षी पक्ष का मनोबल बढ़ गया है. परिवार के मुखिया वृद्ध सहरंग तुरी और महरंग तुरी ने बताया कि उनका परिवार पिछले चार पीढ़ियों से कोब्जा टेढ़ाचुआ में रह रहा है. उनकी जमीन पर दादा-परदादा के समय का घर भी बना हुआ है. इसके बावजूद अब उन्हें उनकी जमीन और घर से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने बताया कि बेटे कलेश तुरी के नाम पर आवास स्वीकृत हुआ है, लेकिन घर बनाने नहीं दिया जा रहा. जमीन विवाद लंबे समय से चल रहा है. विपक्षी पक्ष पोकलेन मशीन से घर धंसाने और गांव से भगाने की धमकी दे रहा है, जिससे पूरा परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है. सहरंग और महरंग तुरी ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे मजबूरी में सीओ कार्यालय के बाहर आत्मदाह करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.

विवादित जमीन पर निर्माण का आरोप : सीओ

इस मामले में सीओ शैलेंद्र कुमार चौरसिया ने बताया कि बीते मंगलवार को दोनों पक्षों को कार्यालय बुलाकर उनकी बातें सुनी गयीं. उन्होंने कहा कि सहरंग तुरी, महरंग तुरी और स्वर्गीय घुरन तुरी (तीनों भाई) को वर्ष 1976 में दो डिसमिल जमीन आवंटित हुई थी, जहां वे अपने परिवार के साथ रह रहे थे. सीओ के अनुसार परिवार बढ़ने के साथ वे लोग आवंटित जमीन के अतिरिक्त दूसरी जगह पर भी मकान बनाने लगे. पंजी-2 की जांच में जिस जमीन पर सरकारी आवास बनाया जा रहा है, वह विवादित पायी गयी और वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है. इस कारण दूसरे पक्ष ने उस जमीन पर अपना दावा करते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया. सीओ ने कहा कि लाभुक अपने आवंटित जमीन पर आवास निर्माण कर सकते हैं.

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