Gumla: सरना धर्म कोड व परिसीमन के विरोध में चार अक्तूबर को गुमला में जुटेंगे आदिवासी

सरना धर्म कोड और परिसीमन के विरोध में गुमला में होने वाली आदिवासी महारैली की तारीख बदल दी गई है. अब यह रैली 4 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी.

गुमला. सरना धर्म कोड लागू कराने एवं परिसीमन के विरोध में 18 सितंबर को गुमला में प्रस्तावित आदिवासी महारैली की तिथि में बदलाव किया गया है. अब यह महारैली चार अक्तूबर 2026 को गुमला में आयोजित होगी. यह फैसला आदिवासी छात्र संघ केंद्रीय समिति रांची की ओर से सरना सम्मेलन मैदान गुमला में हुई एक बैठक में लिया गया. बैठक में राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक और दुखद निधन हो गया, जिससे गहरा शोक व्याप्त था. इसके अलावा, प्राकृतिक पर्व करमा भी नज़दीक था. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, रैली की तारीख बदलने का फैसला किया गया.

आदिवासी छात्र संघ केन्द्रीय समिति के आह्लाद उरांव व छोट्या उरांव ने बताया कि करमा पर्व की वजह से महारैली के आयोजन और उसे सफल बनाने में दिक्कत हो रही थी. साथ ही, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए भी रैली की तारीख बदली गयी है. अब करमा पर्व के बाद चार अक्टूबर को महारैली होगी.

तिथि परिवर्तन की घोषणा के बाद, बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया, जिसमें कुरमी समाज द्वारा करमा पर्व मनाने के निर्णय पर संघ ने चिंता जताई.

कुरमी समाज के करमा पर्व मनाने के फैसले का विरोध

बैठक में कुरमी समाज की ओर से करमा पर्व मनाने की घोषणा का विरोध किया गया. आदिवासी छात्र संघ का आरोप है कि जनजाति सूची में शामिल होने के उनके प्रयास के तहत कुरमी समाज करमा पर्व मना रहा है. इस निर्णय पर संघ ने चिंता व्यक्त की.

सैकड़ों छात्र बैठक में हुए शामिल

बैठक में आदिवासी छात्र संघ के अहलाद उरांव, जतरू उरांव, डॉ. सुशील मिंज, अमीन उरांव, अमिता उरांव, अमृता उरांव, जीता उरांव, राज मिंज, मंगल उरांव, पवन उरांव सहित सैकड़ों छात्र मौजूद थे. संघ ने सरना धर्म कोड लागू कराने और परिसीमन (निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन) के विरोध में प्रस्तावित महारैली को सफल बनाने का आह्वान किया.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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