सहभागी ग्राम विकास योजना को लेकर तीन दिवसीय कार्यशाला, 53 समुदाय लीडरों ने लिया प्रशिक्षण

गुमला में ग्राम पंचायत विकास योजना को प्रभावी बनाने के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया.

रायडीह (गुमला): ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) को अधिक सहभागी और पोषण-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से विकास संवाद समिति, गुमला के तत्वावधान में केपुर पंचायत भवन, मांझाटोली में तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गयी. कार्यशाला में 20 गांवों के 53 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इनमें 26 महिलाएं और 27 पुरुष शामिल थे. पंचायत प्रतिनिधियों, समुदाय लीडरों और युवाओं को ग्राम विकास की योजनाएं तैयार करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया.

स्थानीय जरूरतों के आधार पर योजना बनाने पर जोर

कार्यशाला में प्रतिभागियों को स्थानीय जरूरतों की पहचान, प्राथमिकताओं का निर्धारण और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने की जानकारी दी गयी. साथ ही सरकारी योजनाओं को ग्राम पंचायत विकास योजना से जोड़ते हुए ग्राम स्तर पर सूक्ष्म नियोजन तैयार करने की प्रक्रिया समझायी गयी. प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीणों की जरूरतों और सुझावों को योजना निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करना रहा.

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ग्रामसभा में ग्रामीणों की भागीदारी जरूरी

मुखिया चुईयां उरांव ने कहा कि गांव के विकास के लिए ग्रामसभा को मजबूत करना जरूरी है. योजनाओं के निर्माण में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी होगी, तभी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर विकास योजना तैयार की जा सकती है.

व्यावहारिक अभ्यास से समझी योजना निर्माण की प्रक्रिया

प्रशिक्षण के दौरान समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास, प्रस्तुतीकरण और फिल्म प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को योजना निर्माण की बारीकियां समझायी गयीं. प्रतिभागियों ने बिरकेरा गांव की ग्रामसभा में भी भाग लिया और ग्राम स्तर पर योजना तैयार करने की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा. कार्यशाला में विकास संवाद समिति की परियोजना समन्वयक सहित टीम के सदस्यों ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया. इस दौरान ग्रामीण विकास में समुदाय की भूमिका, पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और युवाओं की भागीदारी को लेकर भी चर्चा की गई.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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