आंजनधाम में न नक्सली खौफ और भय, अंजनी लाल के दर्शन कर भक्त हुए निहाल

आंजनधाम में न नक्सली खौफ और भय, अंजनी लाल के दर्शन कर भक्त हुए निहाल

जगरनाथ पासवान, गुमला

गुमला से 21 किलोमीटर दूर पहाड़ों और जंगलों के बीच स्थित आंजनधाम को हनुमानजी की जन्मस्थली माना जाता है. रामनवमी पर्व पर यह स्थल हजारों भक्तों से भर गया. तेज धूप और कठिन रास्तों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ. जय श्रीराम और बजरंग बली के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा. भक्तों ने माता अंजनी और बालक हनुमान के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की.

सुबह छह बजे से ही भक्तों की भीड़ पहाड़ की चोटी पर स्थित मुख्य मंदिर और आंजन गांव के मंदिर में उमड़ने लगी. देर शाम तक पूजा-पाठ का दौर चलता रहा. इस वर्ष अन्य वर्षों की तुलना में अधिक भीड़ देखी गयी. नक्सली खौफ से मुक्त होकर वृद्ध, महिलाएं, बच्चे और युवक दो किलोमीटर पैदल चलकर या वाहन से मंदिर पहुंचे. मुख्य मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था. माता अंजनी की गोद में बैठे बालक हनुमान का श्रृंगार भक्तों को विशेष रूप से आनंदित कर रहा था. शंख और घंटों की ध्वनि से पूरा जंगल गूंज उठा.

209 वर्षों से जीवित परंपरा

आंजन गांव का प्राचीन अखाड़ा इस स्थल की विशेष पहचान है. यहां 209 वर्षों से पूजा की परंपरा जीवित है. आदिवासी समाज के लोग हनुमान की तरह लंगोटा बांधकर पूजा करते हैं. पुराने अस्त्र-शस्त्र की पूजा भी इस परंपरा का हिस्सा है. श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके पूर्वजों ने यह पूजा शुरू की थी और अब वे इसे आगे बढ़ा रहे हैं. आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को जीवित रखेंगी.

मेला में उमड़ा जनसैलाब

आंजनधाम समिति के विक्की सोनी ने बताया कि ऐतिहासिक रामनवमी मेला का उद्घाटन शाम पांच बजे हुआ. हजारों लोग इसमें शामिल हुए और एक स्वर में हनुमान का जयघोष किया. भक्तों ने पहले पूजा-पाठ कर दर्शन किये और फिर मेले में घूमकर मनोरंजन किया. देर रात तक मेला चलता रहा. इसमें आंजन, कांसीटोली, चीरोडीह, ऊपर आंजन, जेना, डुमरडीह, गढ़टोली, हुरहुरिया, चुगली, हरनाखाड़, मरवा, गानी, चैनपुर, सेमरडीह, दाड़टोली, डुमरला, श्रीपुर, बेहराटोली, कुलही, मड़वा, माड़ापानी और बेतरटोली गांवों के लोग शामिल हुए.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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