स्कूल की चहारदीवारी के लिए सांसद की अनुशंसा भी बेअसर, एक साल बाद भी नहीं शुरू हुआ निर्माण

गुमला के राजकीयकृत उत्क्रमित उच्च विद्यालय में सांसद की सिफारिश और दिशा बैठक के निर्देश के बावजूद चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है. छात्र परेशान हैं.

गुमलाः सांसद सुखदेव भगत की अनुशंसा और उपायुक्त के निर्देश के बावजूद राजकीयकृत उत्क्रमित उच्च विद्यालय खोरा अब तक चहारदीवारी विहीन है. विद्यालय में चहारदीवारी निर्माण के लिए सांसद ने दो अगस्त 2025 को अनुशंसा की थी. इससे पहले 31 जुलाई 2025 को उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त को पत्र भेजकर निर्माण की मांग की थी. इसके बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है.

दिशा की बैठक में भी उठा था मामला

विद्यालय की चहारदीवारी का मामला सात जून 2026 को हुई दिशा की बैठक में भी प्रमुखता से उठाया गया था. बैठक में संबंधित पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया गया था. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने दोबारा उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर चहारदीवारी निर्माण कराने की मांग की है.

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405 विद्यार्थी और 20 शिक्षक हैं कार्यरत

प्रधानाध्यापक ने ज्ञापन में कहा है कि विद्यालय में वर्तमान में 405 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं और 20 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं. विद्यालय का मैट्रिक परीक्षाफल लगातार तीन वर्षों से शत-प्रतिशत रहा है. इसके बावजूद चहारदीवारी नहीं होने से शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होता है और पठन-पाठन में व्यवधान उत्पन्न होता रहता है. प्रधानाध्यापक ने उपायुक्त से तत्काल संज्ञान लेकर चहारदीवारी निर्माण कराने की मांग की है.


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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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