गुमला को मॉडल शहर बनाने का सपना अधूरा, सिटी मैनेजर की कार्यशैली पर जनता ने उठाए सवाल

गुमला नगर परिषद के सिटी मैनेजर पर विकास कार्यों में लापरवाही और जनता की अनदेखी के आरोप लगे हैं. जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों अधूरा है शहर का विकास.

गुमलाः गुमला नगर परिषद की कहानी जारी है. इस बार बात शहर के विकास की अहम कड़ी माने जाने वाले सिटी मैनेजर की. सिटी मैनेजर के जिम्मे शहर के विकास का प्लान तैयार करने, सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने, साफ-सफाई, जलापूर्ति और जनता की समस्याओं के समाधान में अहम भूमिका निभाना है. लेकिन गुमला के सिटी मैनेजर के कार्यकाल को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं.

जनता का आरोप है कि सिटी मैनेजर ने शहर का भ्रमण कर जमीनी समस्याओं को जानने और लोगों से संवाद करने में रुचि नहीं दिखायी. लोगों का कहना है कि नगर परिषद में सिटी मैनेजर सिर्फ नाम के रह गये हैं. यही वजह है कि वर्षों से गुमला को मॉडल शहर बनाने का सपना अब तक अधूरा है.

प्रतिनिधियों से भी हो चुका है विवाद

सिटी मैनेजर के कामकाज को लेकर नगर परिषद के प्रतिनिधियों में भी नाराजगी रही है. कई बार प्रतिनिधियों और सिटी मैनेजर के बीच विवाद की स्थिति बनने की बात सामने आती रही है. हालांकि, बाद में मामला शांत हो गया. लोगों का कहना है कि नगर परिषद के अंदर किसी तरह मामला सुलझ जाता है, लेकिन इसका खमियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है.

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कार्यालय के बाहर समस्याएं जस की तस

नगर परिषद में कामकाज को लेकर लोग तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि कार्यालय के अंदर मामले किसी तरह सुलझ जाते हैं, लेकिन शहर की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए जमीन पर पर्याप्त पहल नहीं दिखती. सफाई, जलापूर्ति और दूसरी नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोगों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ता है.

25 दिन पहले हो चुका है तबादला

सिटी मैनेजर का करीब 25 दिन पहले ही गुमला से तबादला हो चुका है. इसके बावजूद वह अब तक गुमला नगर परिषद में जमे हुए हैं. नगर परिषद के उपाध्यक्ष रमेश कुमार ने बताया कि गुमला में नये सिटी मैनेजर को योगदान देना था, लेकिन उन्होंने समय पर योगदान नहीं दिया. इसी कारण पुराने सिटी मैनेजर के यहां बने रहने की स्थिति उत्पन्न हुई.

उपाध्यक्ष के अनुसार अब नये सिटी मैनेजर ने योगदान दे दिया है. इसके बाद पुराने सिटी मैनेजर के गुमला से जाने का रास्ता साफ हो गया है. संभावना है कि सात सितंबर को वे स्थानांतरित नगर परिषद क्षेत्र में योगदान देने के लिए गुमला से रवाना होंगे.

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अध्यक्ष बोलीं- अधिकारियों के कारण काम प्रभावित

नगर परिषद की अध्यक्ष शकुंतला उरांव ने भी माना कि जनता के लिए जिस तरह काम होना चाहिए, वह कुछ अधिकारियों के कारण नगर परिषद में ठीक से नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि पुराने अधिकारियों के यहां से जाने के बाद शहर के विकास को गति मिलने की उम्मीद है.

सवाल यही- कब बनेगा गुमला मॉडल शहर?

गुमला को मॉडल शहर बनाने का सपना वर्षों से देखा जा रहा है. लेकिन शहर की बुनियादी समस्याएं और नगर परिषद के कामकाज को लेकर उठते सवाल इस सपने की राह में चुनौती बने हुए हैं. अब नये सिटी मैनेजर के योगदान के बाद शहर के लोगों को उम्मीद है कि नगर परिषद की कार्यशैली में बदलाव आयेगा और विकास योजनाओं का लाभ जमीन पर दिखाई देगा.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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