यूरिया-डीएपी की अधिक कीमत वसूली के विरोध में आदिवासी महासभा ने निकाला जुलूस

घाघरा में अखिल भारतीय क्रांतिकारी आदिवासी महासभा ने डीएपी और यूरिया की अधिक कीमत पर बिक्री के खिलाफ जुलूस निकालकर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है.

घाघरा (गुमला): यूरिया और डीएपी खाद की बोरियों पर अंकित एमआरपी से अधिक कीमत वसूले जाने के विरोध में अखिल भारतीय क्रांतिकारी आदिवासी महासभा ने घाघरा में जुलूस निकाला. जिलाध्यक्ष सनिया उरांव के नेतृत्व में निकाला गया जुलूस नेतरहाट रोड से शुरू होकर ब्लॉक चौक तक पहुंचा.

एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने का आरोप

महासभा ने आरोप लगाया कि किसानों से डीएपी की बोरी पर अंकित एमआरपी से 800 से 1000 रुपये तक अधिक राशि वसूली जा रही है. वहीं यूरिया की बिक्री में भी 150 से 200 रुपये तक अधिक कीमत ली जा रही है. इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है.

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खाद की कालाबाजारी रोकने की मांग

महासभा ने उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने की मांग की. संगठन ने किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराने तथा लाइसेंसधारी खाद-बीज दुकानों में अनिवार्य रूप से मूल्य तालिका लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की. जुलूस में सुरेश प्रसाद यादव, अनिल उरांव, तेंबू उरांव, बिहारी उरांव, मंगल उरांव, जीतन उरांव, बाबू राम गोप, सुरेश गोप, विमल उरांव, बंधु महली, बुधवा उरांव, राजेंद्र उरांव, सुदर्शन भगत, हरिश्चंद्र उरांव, विनोद उरांव और सीताराम उरांव समेत कई लोग शामिल थे.


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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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