Gumla में हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन ! मुख्य सड़क पर खड़े 7 जर्जर पेड़ दे रहे चेतावनी

डुमरी के नवाडीह-चैनपुर मार्ग पर सात सूखे पेड़ गिरने की कगार पर हैं, जिससे स्कूली बच्चों और राहगीरों की जान को खतरा है. प्रशासन से इन्हें हटाने की मांग की गई है.

गुमलाः डुमरी प्रखंड के नवाडीह से चैनपुर जाने वाली मुख्य सड़क पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. सड़क किनारे करीब एक किलोमीटर के दायरे में सात सूखे और जर्जर आम के पेड़ खड़े हैं, जो तेज हवा और बारिश के दौरान टूटकर सड़क पर गिर सकते हैं. इस मार्ग से हर दिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहनों के साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन गुजरते हैं. आसपास के गांवों के स्कूली बच्चे भी इसी सड़क से आवागमन करते हैं. ऐसे में जर्जर पेड़ों को लेकर ग्रामीणों में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है.

लंबे समय से जर्जर हैं पेड़, विभाग ने नहीं की पहल

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क किनारे खड़े ये पेड़ लंबे समय से सूखे और जर्जर हालत में हैं. कई पेड़ पूरी तरह सूख चुके हैं और उनकी शाखाएं भी कमजोर हो गई हैं. इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से अब तक इन पेड़ों का निरीक्षण कराने या इन्हें हटाने की दिशा में कोई पहल नहीं की गई है. ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और तेज हवा के दौरान सूखे पेड़ों के सड़क पर गिरने का खतरा और बढ़ जाता है. सड़क पर वाहनों की आवाजाही और स्कूली बच्चों के नियमित आवागमन को देखते हुए किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है.

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दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल सड़क किनारे खड़े सूखे पेड़ों का निरीक्षण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि सभी सात जर्जर पेड़ों को सुरक्षित तरीके से हटाया जाए, ताकि राहगीरों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को संभावित खतरे से बचाया जा सके. ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से इस मामले में जल्द कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि सूखे पेड़ों के कारण किसी अनहोनी की स्थिति उत्पन्न न हो.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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