गुमला में वैज्ञानिक-किसान संवाद, 70 से अधिक रेशम किसानों ने साझा की समस्याएं

गुमला में मेरा रेशम मेरा अभिमान कार्यक्रम के तहत किसानों को रेशम उत्पादन की आधुनिक तकनीक और आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक किया गया।

गुमला : केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी) द्वारा संचालित मेरा रेशम मेरा अभिमान (एमआरएमए 2.0) कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों और किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़कर अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिए जागरूक किया जा रहा है. इसी कड़ी में अग्र परियोजना केंद्र गुमला में वैज्ञानिक-किसान संवाद का आयोजन किया गया. इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 70 से अधिक मालवरी रेशम किसान और ग्रामीण शामिल हुए.

किसानों ने वैज्ञानिकों के सामने रखीं समस्याएं

संवाद के दौरान किसानों ने रेशम कीटपालन से जुड़ी अपनी समस्याओं और चुनौतियों को वैज्ञानिकों व तकनीकी कर्मियों के समक्ष रखा. विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याएं सुनीं और आवश्यक तकनीकी जानकारी देते हुए समाधान के सुझाव दिये. साथ ही हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया. किसानों ने रेशम उत्पादन से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किये.

झारखंड सरकार के हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प विभाग के सहयोग से आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को रेशम उत्पादन की संभावनाओं, आधुनिक कीटपालन तकनीक और इसके आर्थिक लाभ की जानकारी दी जा रही है. एमआरएमए 2.0 के तहत जिले में निर्धारित आठ कार्यक्रमों में से छह कार्यक्रम विभिन्न गांवों और पंचायतों में आयोजित किये जा चुके हैं.

वैज्ञानिक और अधिकारियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में अग्र परियोजना केंद्र के परियोजना पदाधिकारी ललन कुमार रजक का विशेष सहयोग रहा. केंद्रीय रेशम बोर्ड की ओर से निदेशक डॉ प्रतीश कुमार पीएम, वैज्ञानिक डॉ कमलेश वर्मा, वैज्ञानिक डॉ शांताकर गिरी तथा लोहरदगा सीएसबी कार्यालय के प्रभारी पूर्णचंद्र पाणिग्राही मौजूद थे.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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