गुमला. गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड क्षेत्र स्थित बर महादेव का प्राचीन शिवलिंग आज भी श्रद्धालुओं के लिए अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. विशाल बरगद के पेड़ के नीचे सात अरघा में विराजमान इस शिवलिंग के प्रति ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गयी हर मनोकामना पूरी होती हैं.
कई राज्यों से आते हैं श्रद्धालु
यही वजह है कि बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा समेत कई राज्यों से प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. रेहलदाग निवासी 100 वर्षीय बुजुर्ग बैजनाथ यादव के अनुसार जहां आज मंदिर स्थित है, वहां कभी 100 से अधिक परिवारों का खुशहाल गांव हुआ करता था.
लोगों की लोक मान्यता
लोक मान्यता है कि किसी बात से नाराज होकर एक साधु ने गांव को श्राप दे दिया था. इसके बाद गांव में प्रतिदिन बाघ के आने और घरों में रहस्यमय घटनाएं होने लगीं. इससे भयभीत होकर ग्रामीणों ने धीरे-धीरे गांव छोड़ दिया. इसके बाद वर्तमान रैयत श्री वकील के परदादाओं ने वहां विधि-विधान के साथ शिवलिंग स्थापित करने का निर्णय लिया.
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हाथी पर सवार होकर पहुंचे थे पालकोट के राजा
बताया जाता है कि इस ऐतिहासिक आयोजन में पालकोट के राजा स्वयं हाथी पर सवार होकर पहुंचे थे. शिवलिंग की स्थापना के बाद रेहलदाग के ब्राह्मण और हाकाजांग के वर्मा परिवार को पूजा-पाठ की जिम्मेदारी सौंपी गयी. पिछले 11 वर्षों से कल्याण बाबा मंदिर में लगातार सेवा और देखरेख कर रहे हैं. वर्तमान में सावन माह के अवसर पर मंदिर परिसर में 108 धाराओं से भगवान शिव का भव्य रुद्राभिषेक किया जा रहा है. रुद्राभिषेक के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है और दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद ले रहे हैं.
