घाघरा (गुमला) : घाघरा थाना क्षेत्र के पलमा गांव में तीन वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद पंचायत लगाकर मामला दबाने और आरोपी पर जुर्माना लगाकर समझौता कराने के आरोपों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को जिला स्तर की टीम गांव पहुंची और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच की.
जिला स्तरीय टीम ने गांव पहुंचकर जुटाई जानकारी
उपायुक्त के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी डॉ. शिशिर कुमार सिंह, अंचलाधिकारी सुशील कुमार, थाना प्रभारी मोहन कुमार समेत कई अधिकारियों ने पीड़िता के गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार, ग्रामीणों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की. अधिकारियों ने विभिन्न पहलुओं पर जानकारी जुटाकर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की.
घटना को बताया मानवता को शर्मसार करने वाला
जिला पंचायती राज पदाधिकारी डॉ शिशिर कुमार सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला बेहद दर्दनाक और मानवता को शर्मसार करने वाला है. जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि घटना को दबाने के उद्देश्य से गांव में बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में पंचायत समिति सदस्य जितेंद्र उरांव की मौजूदगी की भी जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह पंचायती राज अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा. इस संबंध में विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर वरीय अधिकारियों को सौंपी जाएगी, ताकि नियमानुसार कार्रवाई की जा सके.
ग्रामीण खुलकर नहीं बता रहे पूरी बात
डॉ. शिशिर कुमार सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच के दौरान कई ग्रामीण खुलकर जानकारी देने से बचते नजर आए. इसके बावजूद पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध को पंचायत की बैठक के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करना भी कानूनन अपराध है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें रिपोर्ट के माध्यम से प्रशासन को सौंपा जाएगा.
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का भरोसा
अंचलाधिकारी सुशील कुमार ने कहा कि उपायुक्त के निर्देश पर जिला स्तर की टीम पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है. जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. पुलिस और प्रशासन पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
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