पासबुक में लाखों रुपये, ऑनलाइन बैलेंस जीरो, डाकघर के सैकड़ों खाताधारकों में मचा हड़कंप

गुमला के गेरदा डाकघर में बड़ा घोटाला सामने आया है. खाताधारकों की पासबुक में लाखों रुपये दर्ज हैं, लेकिन ऑनलाइन सिस्टम में बैलेंस शून्य दिख रहा है. जांच जारी है.

गुमला. गुमला जिले के गेरदा डाकघर में हड़कंप मच गया है. खाताधारकों की वर्षों की जमा पूंजी को लेकर यह स्थिति बनी है. ग्रामीणों का आरोप है कि जहाँ एक ओर खाताधारकों की पासबुक उनकी मेहनत की कमाई को लाखों के आंकड़े में दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर डाकघर के डिजिटल सिस्टम में वही खाते खाली नज़र आ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. इससे सैकड़ों खाताधारकों की चिंता बढ़ गयी है. ग्रामीणों ने डाक अधीक्षक से इस पूरे मामले की गहन और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, जिसमें तत्कालीन पोस्टमास्टर और अन्य संबंधित कर्मियों की भूमिका का पता लगाया जा सके. गुरुवार को गेरबा गांव निवासी मेघनाथ महतो के नेतृत्व में सैकड़ों खाताधारकों ने गुमला डाक अधीक्षक को आवेदन सौंपा.

ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र के लोग वर्षों से डाकघर में बचत खाता समेत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अपनी मेहनत की कमाई जमा करते आ रहे हैं. आरोप है कि तत्कालीन पोस्टमास्टर आबिद मियां के निधन के बाद खाताधारक जब अपने खातों की जानकारी लेने और राशि निकालने पहुंचे, तो कई खातों में रकम नहीं दिखी. ग्रामीणों का दावा है कि पासबुक में लाखों रुपये दर्ज होने के बावजूद डाकघर के ऑनलाइन सिस्टम में शून्य बैलेंस मिल रहा है.

इस बीच, जब ग्रामीणों ने वर्तमान पोस्टमास्टर से संपर्क साधा, तो जांच कराने पर भी कई खातों में राशि शून्य पायी गयी. एक खाताधारक, जो अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं करना चाहते, ने बताया, "मेरी बेटी की शादी तय थी, उसके लिए मैंने बरसों से पैसे जमा किए थे. अब पासबुक में तो लाखों दिख रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन में सब ज़ीरो है. समझ नहीं आ रहा कि बेटी की शादी कैसे होगी."

ग्रामीणों ने तत्कालीन पोस्टमास्टर समेत संबंधित कर्मियों की भूमिका की जांच की मांग की है. उन्होंने खातों, पासबुक, लेजर और अन्य अभिलेख सुरक्षित रखने तथा गड़बड़ी साबित होने पर खाताधारकों की पूरी राशि वापस दिलाने की मांग की. डाक अधीक्षक ने जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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