चार साल बाद खुला हत्या का राज, कब्र खोदकर निकाला गया कंकाल

गुमला के रायडीह में डायन-बिसाही के शक में हुई हत्या का चार साल बाद खुलासा। पुलिस ने कब्र खोदकर कंकाल निकाला, डीएनए जांच के लिए रांची भेजा गया।

गुमला: गुमला स्थित रायडीह थाना के नवागढ़ बैगा टोली में चार वर्ष पूर्व दफनाये गये एक व्यक्ति के शव को मंगलवार को प्रशासनिक निगरानी में कब्र खोदकर बाहर निकाला गया. मृतक मलकन बैगा के कंकाल को विधि-विज्ञान जांच, पोस्टमार्टम एवं डीएनए परीक्षण के लिए रांची भेजा गया है. यह कार्रवाई मृतक की पुत्री उर्मिला देवी द्वारा अपने पिता की हत्या का आरोप लगाते हुए दर्ज करायी गयी प्राथमिकी के आधार पर की गयी है.

प्राथमिकी के अनुसार, विगत सात जून 2022 को डायन-बिसाही के आरोप में मलकन बैगा की बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर दी गयी थी. उर्मिला देवी ने आरोप लगाया है कि उनके रिश्तेदारों और गांव के ही कई लोगों ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया था और मामले को दबाने के उद्देश्य से शव को चुपचाप कब्रिस्तान में दफना दिया गया था.

उस समय बेटी ने पुलिस से शिकायत की थी. परंतु, पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. चार वर्षों तक मामला दबा रहने के बाद आखिरकार पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कांड संख्या 29/2026 दर्ज किया.

अनुमंडल पदाधिकारी चैनपुर श्रुति के निर्देश पर अंचलाधिकारी शैलेंद्र चौरसिया, रायडीह थाना प्रभारी संदीप कुमार यादव और सीआइ प्रदीप कुमार की उपस्थिति में पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराते हुए कंकाल को बाहर निकाला गया. पुलिस ने कहा पुलिस का कहना है कि डीएनए और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जायेगी. यह घटना समाज में गहराई तक फैले डायन-बिसाही जैसे अंधविश्वास की भयावह तस्वीर को सामने लाती है. यदि जांच में आरोप सही पाये जाते हैं, तो यह अंधविश्वास के नाम पर कानून और मानवता को शर्मसार करने वाला जघन्य अपराध साबित होगा. पुलिस फिलहाल सभी बिंदुओं पर गहन छानबीन कर रही है. कुछ लोगों में हड़कंप इधर, कब्र से शव निकाले जाने के बाद जिन लोगों ने शव को दफनाया था. उन लोगों में हड़कंप है. इस मामले को लेकर गांव के कुछ लोग भी गंभीर हैं. कुछ लोग मामले के उदभेदन की मांग कर रहे हैं तो कुछ लोग डरे हुए हैं.


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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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