मूक-बधिर बच्चों ने सांकेतिक भाषा में गाया राष्ट्रगान, गुमला में स्वतंत्रता दिवस समारोह ने जीता दिल

गुमला के मुक्ति संस्थान में मूक-बधिर और नेत्रहीन बच्चों ने देशभक्ति के साथ 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सबका मन मोह लिया.

गुमला. मूक-बधिर, नेत्रहीन एवं स्पैष्टिक आवासीय विद्यालय, गुमला (मुक्ति संस्थान) में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया. कार्यक्रम में मुक्ति संस्थान की सचिव रुमा दत्ता ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इसके बाद विद्यालय परिसर में सामूहिक राष्ट्रगान हुआ. मूक-बधिर बच्चों ने कर पल्लवी के माध्यम से राष्ट्रगान को सांकेतिक भाषा में प्रस्तुत किया.

दृष्टिबाधित बच्चों ने खुद वाद्य यंत्र बजाकर दी शानदार प्रस्तुति

ध्वजारोहण से पूर्व बच्चों एवं उपस्थित लोगों ने प्रभात फेरी निकाली. इस दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम् और जय जवान-जय किसान के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा. स्थानीय लोगों ने भी बच्चों का उत्साह बढ़ाया. सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत दृष्टिबाधित बच्चों के स्वागत गीत से हुई. तिरंगे और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों ने देशभक्ति गीत, कविता, भाषण एवं नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया. दृष्टिबाधित बच्चों ने स्वयं वाद्य यंत्र बजाकर “भारत मेरा सबसे है प्यारा, चारों ओर खुशियों का है नजारा” गीत प्रस्तुत किया. मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुमला अजित कुमार सिंह ने कहा कि यहां के बच्चे प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास के धनी हैं.

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किसी भी समस्या पर विधिक मदद लेने की अपील

उन्होंने विद्यालय के शिक्षक-कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की. उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को बच्चों के सभी आवश्यक प्रमाण पत्र अपडेट रखने का निर्देश दिया. विशिष्ट अतिथि डालसा सचिव राम कुमार लाल गुप्ता ने बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी समस्या पर वे विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं. प्रधानाध्यापक नंद किशोर बाबू महान ने उन्हें ग्रुप हियरिंग एड सिस्टम की जानकारी दी. संचालन नंद किशोर बाबू महान, संगीत प्रस्तुति विकास उरांव तथा धन्यवाद ज्ञापन शिक्षिका साबित्री तिर्की ने किया.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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