प्रतिनिधि, गुमला. गुमला जिले के 12 प्रखंडों में झामुमो ने अपना तेवर दिखाया. केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026 के विरोध में झामुमो ने शनिवार को जिले के सभी 12 प्रखंडों एवं नगर क्षेत्र में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया. इसमें झामुमो के हजारों कार्यकर्ता शामिल थे. केंद्रीय समिति के आह्वान पर आयोजित आंदोलन का नेतृत्व झामुमो जिलाध्यक्ष सह गुमला विधायक भूषण तिर्की ने किया. धरना के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन भेजकर अधिनियम के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की गयी.
विधायक भूषण तिर्की ने कहा कि झामुमो ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए झारखंड के संवैधानिक एवं संघीय अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की. झारखंड की पहचान उसकी मिट्टी, जंगल, पहाड़, नदियों और खनिज संपदा से है. आदिवासी एवं मूलवासी समाज के लिए ये केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, पहचान और अस्तित्व का हिस्सा हैं. भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और तिलका मांझी जैसे वीरों का संघर्ष इसी धरती, जल, जंगल और अधिकारों की रक्षा के लिए रहा है. उन्होंने कहा कि झामुमो की राजनीतिक यात्रा भी इसी ऐतिहासिक संघर्ष की लोकतांत्रिक निरंतरता है.
विधायक ने कहा कि केंद्र सरकार जान-बूझकर परेशान करने में लगी है. संशोधन अधिनियम के तहत एमएमडीआर अधिनियम में जोड़ी गयी धारा 9डी से राज्यों की खनिज अधिकारों अथवा खनिजयुक्त भूमि पर कर, उपकर या अन्य शुल्क लगाने की शक्ति केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन हो गयी है. झामुमो ने इसे राज्यों के संवैधानिक अधिकारों और संघीय व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताया. विधायक ने कहा कि केंद्र सरकार के इस कानून का विरोध होता रहेगा, जब तक इस पर पुनर्विचार नहीं किया जाता. मैं इस मुद्दे पर चुप रहने वाला नहीं हूं.
मंच संचालन रंजीत सिंह सरदार ने किया. धरना में झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सतीश उरांव, नगर अध्यक्ष मोहम्मद लड्डन, जिला सचिव आरिफ अंसारी, केंद्रीय सदस्य रणजीत सिंह, केंद्रीय सदस्य कलीम अख्तर, संजय सिंह, सिकुनदा लकड़ा, हर्षिता टोप्पो, रमेश गोप, नुरुल होदा, विशेश्वर महली, वीरेंद्र उरांव, अनवर खान, मीडिया प्रभारी मो साजिद, सुरेंद्र सुशील टोप्पो, नीलम लकड़ा.
