कुरमी व तेली जाति पिछले दरवाजे से एसटी का दर्जा लेने में लगे हुए हैं : अशोक

ऑल झारखंड आदिवासी छात्र संघ गुमला की बैठक मुख्य छात्रावास गुमला में छात्रा प्रमुख तरुण उरांव की अध्यक्षता में हुई

ऑल झारखंड आदिवासी छात्र संघ गुमला की बैठक में लिये गये निर्णय आदिवासी छात्र संघ 31 अक्तूबर को गुमला में आदिवासी जनआक्रोश चेतावनी महारैली निकालेगा 23 गुम 11 में बैठक करते लोग प्रतिनिधि, गुमला ऑल झारखंड आदिवासी छात्र संघ गुमला की बैठक मुख्य छात्रावास गुमला में छात्रा प्रमुख तरुण उरांव की अध्यक्षता में हुई. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 31 अक्तूबर को कुरमी समाज द्वारा एसटी सूची में शामिल होने की मांग के विरोध में आदिवासी जन आक्रोश चेतावनी महारैली का आयोजन गुमला में किया जायेगा. इसकी तैयारी जोर-शोर से चल रही है. तरुण उरांव ने कहा है कि कुछ बीजेपी व आरएसएस के एजेंट गुमला में विगत दिनों बैठक व प्रेसवार्ता की थी. जिसमें आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास किया गया. आदिवासी बचाओ अधिकार मोर्चा ने आदिवासी छात्र संघ की घोषित रैली कर श्रेय लेने में लगे हुए हैं. इसका आदिवासी छात्र संघ पुरजोर विरोध करता है और ऐसे भाजपा व आरएसएस के एजेंटों को सावधान रहने के लिए कहा है. पिछले दरवाजे से तेली समुदाय भी आदिवासी सूची में शामिल होने के लिए कई वर्षों से आंदोलन करते आ रहे हैं. इसका साफ सुथरा उदाहरण पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के समय तेली समुदाय को एसटी में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज चुकी है. इसलिए झारखंड आदिवासी छात्र संघ आह्वान करती है कि रघुवर दास के एजेंट के रूप में जो काम कर रहे हैं. वे सावधान रहें. आछासं के प्रभारी अशोक कुमार भगत ने कहा है कि पिछले दरवाजे से एसटी की सूची में शामिल होने का ख्वाब देखने वाले लोगों की मांग कभी पूरी होने नहीं दी जायेगी. बीजेपी और आरएसएस के एजेंट जिस प्रकार गुमला में आदिवासियों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए आदिवासी समाज को एकजुट होने की जरूरत है. झारखंड के 24 जिलों में आदिवासी समाज को गुमराह करने के लिए भाजपा द्वारा फंडिंग किया जा रहा है और ज्ञात सूत्रों द्वारा यह पता चला है कि गुमला जिले में आदिवासी समाज को गुमराह करने के लिए कुछ एजेंटों को उलगुलान महारैली के नाम पर लाखों रुपये फंडिंग उपलब्ध कराया गया है. इसका आदिवासी छात्र संघ विरोध कर रही है. क्योंकि आदिवासी छात्र संघ आदिवासी एजेंडा में संघर्ष करते आ रही है. आदिवासी छात्र संघ 2000 से अभी तक आदिवासी के तमाम मुद्दों पर संघर्ष करते रही है. 2000 से 2025 के बीच कुरमी व तेली जाति एसटी सूची में शामिल होने की मांग कर रही थी. उस समय जितने भी आरएसएस व बीजेपी के चेहरे दिख रहे हैं. कौन सा बिल में घुस गये थे. उसे समय आदिवासी छात्र संघ ने रोड जाम, चक्का जाम, झारखंड बंद, 72 घंटा चक्का जाम किया था. बैठक में अरुण उरांव, सुरेंद्र उरांव, जोकर खड़िया, मनोज उरांव, चरवा उरांव, अनमोल उरांव, दशरथ उरांव, सूरज उरांव, रोहित उरांव, सुभाष मुंडा, सुखैर खड़िया, केशव मुंडा, रोशन किंडो, अमन उरांव, सूरज उरांव, महावीर मिंज, अशोक कुमार भगत एवं छात्र प्रमुख शामिल थे.

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Author: VIKASH NATH

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