गुमला में कुदाल से काटकर मां की हत्या, बेटी की आंखों के सामने वारदात, आरोपी को उम्रकैद

गुमला के करंज थाना में 2022 में हुई महिला की हत्या के मामले में आरोपी मंगलदास उरांव को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोषी ठहराया है. उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. यह घटना शादी समारोह से लौटते समय हुई थी.

गुमला. करंज थाना क्षेत्र के अम्बेरा गांव में 2022 में एक महिला की हत्या हुई थी. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजित कुमार सिंह की अदालत ने इस मामले में आरोपी मंगलदास उरांव को दोषी पाया. उसे आजीवन कारावास की सजा सुनायी है.

शादी समारोह से लौटने के बाद हुआ विवाद

मामला 16 मई 2022 की रात का है. जानकारी के अनुसार, गांव में शादी समारोह से लौटने के बाद मैनु उरांइन अपनी बेटी जानकी कुमारी और अन्य परिजनों के साथ घर पहुंची थी. घर के अंदर मंगलदास उरांव सोया हुआ था. उसे जगाये बिना मां-बेटी बरामदे में सो गयीं.

रात करीब तीन बजे घर में गाली-गलौज और कुदाल से सामान तोड़ने की शोरगुल सुनकर दोनों की नींद खुली. ऐसा लग रहा था जैसे कोई जानबूझकर हर चीज़ को तोड़फोड़ कर रहा हो. कुदाल की आवाज़ फर्नीचर से टकराने और टूटने की आवाज़ों के साथ मिलकर एक भयानक शोर पैदा कर रही थी. कुर्सियाँ और मेजें ज़ोर-ज़ोर से टूट रही थीं, लकड़ी के टूटने और धातु के टकराने की चीखें सुनाई दे रही थीं. जानकी के अनुसार, मंगलदास घर में रखी कुर्सी-टेबल को कुदाल से तोड़ रहा था.

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विरोध करने पर मां-बेटी पर किया हमला

मां-बेटी ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए कुदाल से दोनों पर हमला कर दिया. जानकी किसी तरह वहां से निकलकर अपनी बहन और जीजा को बुलाने चली गयी.

इसी दौरान मंगलदास ने उसकी मां मैनु उरांइन पर कुदाल से ताबड़तोड़ वार कर दिया. गंभीर चोट लगने से महिला की मौके पर ही मौत हो गयी.

लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को दी सूचना

जानकी के साथ अन्य लोग जब वापस घर पहुंचे तो मैनु उरांइन खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थी. लोगों ने भागने का प्रयास कर रहे मंगलदास को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी.

मृतका की बेटी के फर्द बयान पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया. करीब चार साल बाद अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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