बिशुनपुर. कृषि विज्ञान केंद्र गुमला विकास भारती बिशुनपुर द्वारा चलायी जा रही गतिविधियों के अंतर्गत बोरांग गांव में सरसों प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया. कृषि वैज्ञानिक डॉ नीरज कुमार वैश्य व एनो रॉय ने कई जानकारी दी. उन्होंने किसानों को तिलहनी फसलों के बढ़ावा व सरसों उत्पादन से किसानों के स्थायी आजीविका में वृद्धि विषयक पर जानकारी दी. डॉ नीरज ने कहा कि किसान यदि राई या सरसों की वैज्ञानिक खेती करते हैं, तो उनको कैसे आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक होगा. कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जिले की विभिन्न प्रखंडों घाघरा, बिशुनपुर, रायडीह व बसिया के विभिन्न गांवों बोरांग, बनालात, मलंगटोली, घाघरा, रुकरूम, खटखोर, बेती, बेती जुगनूटोली, बेती बाडोटोली व तेतरा गांवों में 40 हेक्टेयर में सरसों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. केंद्र द्वारा इस वर्ष (2025-26) 260 हेक्टेयर में सरसों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण देकर क्रिटिकल इनपुट बीज खाद उपलब्ध कराया गया है. खड़ी फसल में ड्रोन के माध्यम से सल्फर नैनो यूरिया व कीटनाशक का छिड़काव कराया गया है. प्रत्यक्षण के अंतर्गत सरसों के जिस प्रभेद को किसानों को उपलब्ध कराया गया है, जिसमें तेल की मात्रा का प्रतिशत 40 से 42 प्रतिशत है, जहां पर किसान तीन किलो सरसों से एक किलोग्राम तेल प्राप्त करते थे. वहां पर अब वह 2.5 से 2.75 किलो सरसों से ही एक किलो तेल प्राप्त कर सकेंगे. साथ ही साथ सरसों की खेती करते हैं, तो सरसों का समर्थन मूल्य 5950 रुपये क्विंटल है और सरसों की खेती में कम पानी व कम उर्वरक की आवश्यकता के साथ-साथ खरपतवार के प्रबंधन पर भी किसानों को कम मेहनत करनी पड़ती है. इससे न कि किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि सरकार को जो तेल का आयात करती है. उसमें भी कमी आयेगी. साथ ही साथ यदि सरसों उत्पादन करके अपने घर का तेल खायेंगे, तो उसकी शुद्धता भी अच्छी होगी. मौके पर दिलेश्वर उरांव, कंदरू उरांव, वासमुनी देवी, निर्मलिया देवी, संजीत उरांव, शालो देवी, छेनो देवी, मिलते उरांव आदि उपस्थित थे.
सरसों की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में वरदान : डॉ नीरज
बोरांग गांव में सरसों प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन
