गुमला. कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला, विकास भारती बिशुनपुर ने सोमवार से 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “खाद प्रबंधन का पूरा तरीका” का शुभारंभ किया है. इसका उद्देश्य कृषि और मृदा स्वास्थ्य को टिकाऊ, उत्पादक और पर्यावरणीय रूप से संतुलित बनाना है. प्रशिक्षण 7 से 21 सितंबर तक चलेगा. इसमें गुमला, लातेहार एवं लोहरदगा जिले के 36 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, जिनमें आठ महिलाएं हैं.
खेती की आय बढ़ाने के लिए मिट्टी की उर्वरता बचाना
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विकास भारती बिशुनपुर के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत ने की. उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता एवं स्वास्थ्य को बनाए रखना वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता है. किसानों को पोषक तत्वों के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग तथा स्थानीय संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल को अपनाना चाहिए. इससे न केवल उनकी फसल की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि खेती की लागत भी कम होगी, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी.
जैविक और रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग
डॉ. नीरज कुमार वैश्य ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य उर्वरकों का समय एवं वैज्ञानिक तरीके से समुचित उपयोग सुनिश्चित करना है. उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए जैविक, रासायनिक एवं जैव उर्वरकों के संतुलित उपयोग से मिट्टी की उत्पादकता, पोषक तत्व उपयोग दक्षता एवं फसल गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है. एक किसान, सुरेश ने बताया कि पिछले साल इस तरीके को अपनाने के बाद उसकी धान की उपज में 15% की बढ़ोतरी हुई और खाद पर होने वाला खर्च भी 10% कम हो गया.
मिट्टी की जांच कराकर करें सही खाद का इस्तेमाल
उन्होंने मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन को वैज्ञानिक कृषि की आधारभूत जरूरत बताया. मृदा परीक्षण से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है, जिससे किसान जरूरत के हिसाब से ही खाद का इस्तेमाल कर पाते हैं. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, मृदा परीक्षण मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने और उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. प्रशिक्षणार्थियों को उर्वरक विक्रेता लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जायेगी. कार्यक्रम में सुनील कुमार, इंजीनियर एनो राई एवं अटल बिहारी तिवारी ने भी विचार रखे.
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मिट्टी से लेकर फसल तक मिलेगी व्यावहारिक जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान मृदा परीक्षण, सूक्ष्म पोषक तत्व, जैव उर्वरक, फसल अवशेष प्रबंधन तथा पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग की सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी.
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