खाद्य सुरक्षा से जुड़ी पहलुओं की दी गयी जानकारी
खाद्य सुरक्षा से जुड़ी पहलुओं की दी गयी जानकारी
गुमला. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम 2011 की अनुसूची- चार के प्रावधानों के अनुरूप भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टिफिकेशन कार्यक्रम के अंतर्गत खाद्य कारोबारियों के लिए शनिवार को लोहरदगा रोड स्थित होटल जयपुर में प्रशिक्षण शिविर लगाया गया. शिविर में कुल 150 होटल संचालक, होलसेलर, रिटेलर, सेविका, मध्याह्न भोजन की रसोइया व पलाश कैफे की दीदीयों ने भाग लिया. कार्यक्रम में एफएसएसएआइ के प्रशिक्षक डॉ राकेश सिंह ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी. उन्होंने खाद्य सुरक्षा से संबंधित खतरों, खाद्य विषाक्तता, खाद्य संक्रमण, खाद्य एलर्जी व उनके नियंत्रण उपायों पर प्रकाश डाला. इसके अलावा खाद्य जनित रोग, संचारी व गैर संचारी रोग, फूड ग्रेड रंग, पैकेजिंग सामग्री आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गयी. प्रशिक्षण के दौरान खाद्य व्यवसाय के पंजीकरण एवं लाइसेंस की अनिवार्यता, प्रक्रिया, नियम एवं शर्तें, व्यक्तिगत एवं कार्यस्थल की स्वच्छता, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, लेबलिंग नियम, पेयजल की गुणवत्ता, कीट नियंत्रण, सुरक्षित भंडारण एवं परिवहन, फूड सेफ्टी डिस्प्ले बोर्ड, गोल्डन रूल्स तथा कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गयी. बताया गया कि खाद्य पदार्थों को अखबार, प्रिंटेड पेपर अथवा प्लास्टिक में देना सख्त मना है. वहीं नागरिक क्लब सोसायटी द्वारा एप्रन, कैप, एवं ग्लब्स आदि का वितरण किया गया. खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी गुमला प्रकाश चंद्र गुग्गी ने फोर्टिफाइड फूड, इट राइट इंडिया तथा आज से थोड़ा कम तेल, चीनी और नमक जैसी एफएसएसएआइ की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने हिदायत दी कि बिना वैध एफएसएसएआइ लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, बैच नंबर समेत अन्य आवश्यक विवरण के पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का क्रय-विक्रय करना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है. कार्यक्रम को सफल बनाने में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी, फूड सेफ्टी ट्रेनर डॉ राकेश सिंह, त्रिलोकी नाथ सिन्हा, संतोष पाठक, जितेंद्र कुमार, रवि कुमार, प्रियांशु कुमार, सूरज कुमार खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम व ज्ञान सिटी एजुकेशनल ट्रस्ट सराहनीय योगदान रहा.
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