Gumla News: सरना धर्म कोड और परिसीमन के विरोध में 18 सितंबर को महारैली

गुमला में 18 सितंबर को सरना धर्म कोड लागू करने और परिसीमन के विरोध में आदिवासी छात्र संघ द्वारा एक विशाल महारैली का आयोजन किया जाएगा. पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें.

गुमला. आगामी 18 सितंबर को गुमला में महारैली आयोजित होगी. इसे सफल बनाने को लेकर बुधवार को आदिवासी छात्र संघ एवं प्रार्थना सभा की तैयारी बैठक सरना सम्मेलन मैदान में हुई. बैठक में महारैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया गया.

बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह प्रकृति के साथ हमारा गहरा रिश्ता है, वैसे ही हम आदिवासी समुदाय को अलग सरना धर्म कोड मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से सरना धर्म कोड लागू करने की मांग की जायेगी. साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी जनसंख्या में कमी को आधार बनाकर होने वाले परिसीमन (सीटों का पुनर्गठन) का पुरजोर विरोध किया जायेगा. वक्ताओं के अनुसार, कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने आदिवासियों के लिए पूर्व में रहे धर्म संबंधी प्रावधानों को हटाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय आदिवासियों की अलग पहचान और धर्म कोड को मान्यता दी गयी थी.

लेकिन बाद में इसे समाप्त कर दिया गया. यह मान्यता आदिवासियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इससे उनकी विशिष्ट संस्कृति, पहचान और धार्मिक मान्यताओं को सरकारी स्तर पर स्वीकार्यता मिलती थी. इस मान्यता के समाप्त होने से आदिवासियों को अपनी पहचान बनाए रखने और उसके अनुसार सुविधाओं व अधिकारों को प्राप्त करने में कठिनाई होने लगी. बैठक में कहा गया कि आदिवासी जनसंख्या में कमी के आधार पर परिसीमन (सीटों का पुनर्गठन) स्वीकार्य नहीं होगा. बैठक में आगामी चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों के बहिष्कार का भी आह्वान किया गया. इस बहिष्कार की वजह यह है कि दोनों दलों ने आदिवासियों के हितों का ध्यान नहीं रखा और उनके धर्म संबंधी प्रावधानों को हटाने का काम किया, जिससे उनकी पहचान और अधिकारों पर असर पड़ा.

वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी विरोधी कार्य करने वाली राजनीतिक पार्टियों का विरोध किया जायेगा. बैठक में डॉ सुशील मिंज, ललित उरांव, सावित्री उरांव, जानकी उरांव, प्रभा उरांव, अमृता उरांव, जतरू उरांव, अमीन उरांव, अरुण उरांव, राहुल उरांव, मुकेश उरांव, राज मिंज, बिट्टू उरांव, राजेश मिंज, अंजली उरांव, नमिता उरांव, नाहूल उरांव समेत अन्य लोग उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन आह्लाद उरांव ने किया.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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