गुमला में 36 साल से हो रही गणेश पूजा, 14 सितंबर से शुरू होगा उत्सव

गुमला में गणेश पूजनोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। 14 से 16 सितंबर तक चलने वाले इस उत्सव में शहर के कई पंडालों में भगवान गणेश की भव्य प्रतिमाएं स्थापित होंगी।

गुमला. शहर में श्री गणेश पूजनोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं. विभिन्न स्थानों पर आकर्षक पूजा पंडालों का निर्माण तेजी से चल रहा है, वहीं मूर्तिकार भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. इस वर्ष गणेश पूजनोत्सव 14 सितंबर से शुरू होगा और 16 सितंबर को प्रतिमा विसर्जन के साथ संपन्न होगा.

1990 में शुरू हुई थी सार्वजनिक गणेश पूजा

गुमला में सार्वजनिक गणेश पूजा का इतिहास तीन दशक से अधिक पुराना है. इसकी शुरुआत वर्ष 1990 में ब्लू डायमंड सोसायटी ने की थी. इसके बाद शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कई समितियों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया. वर्तमान में शहर के कई प्रमुख स्थानों पर गणेश पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है.

ब्लू डायमंड सोसायटी के बाद न्यू निराला क्लब द्वारा श्री बड़ा दुर्गा मंदिर में 1995 से, श्री गणपति बप्पा संघ रामनगर द्वारा 2002 से और मुरली बगीचा के राजा क्लब द्वारा 2011 से लगातार सार्वजनिक पूजा का आयोजन किया जा रहा है. इसके अलावा धोबी मोहल्ला, पालकोट रोड स्थित मां शक्ति मंदिर में वर्ष 2012 से, लोहरदगा रोड स्थित मां भवानी संघ, मेन रोड बड़ाइक मोहल्ला और खोरा में वर्ष 2018-19 से पूजा पंडाल बनाकर भव्य आयोजन किया जा रहा है.

प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे मूर्तिकार

शहर के दो प्रमुख स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं. जशपुर रोड स्थित बंगाली क्लब में मूर्तिकार राजकुमार प्रजापति आठ से 10 फीट की बड़ी प्रतिमाओं के साथ कई छोटी प्रतिमाएं भी तैयार कर रहे हैं. वहीं, बड़ा दुर्गा मंदिर परिसर में मूर्तिकार देवकुमार प्रजापति विभिन्न संघों के लिए बड़ी और आकर्षक प्रतिमाएं बना रहे हैं.

पंडाल में दिखेगी आदिवासी संस्कृति की झलक

लोहरदगा रोड कुम्हार ढलान स्थित मां भवानी संघ की ओर से बंगाल की तर्ज पर भव्य पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है. इसमें आदिवासी समाज की कला, संस्कृति और वेशभूषा की झलक देखने को मिलेगी. इस वर्ष पंडाल के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा भी आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगी.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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