आंगनबाड़ी सेविकाओं को दिया गया खास प्रशिक्षण, अब अनाथ बच्चों की जुटायेंगी पूरी जानकारी

गुमला के पालकोट में आंगनबाड़ी सेविकाओं को अनाथ बच्चों के सर्वे के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके.

पालकोट. बाल विकास परियोजना के तत्वावधान में प्रखंड मुख्यालय सभागार पालकोट में शनिवार को आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए एक दिवसीय गैर-आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस प्रशिक्षण में प्रखंड भर से कुल 71 आंगनबाड़ी सेविकाओं ने हिस्सा लिया.

इस दौरान परियोजना के प्रशिक्षक बिनोद कुमार ने सेविकाओं को अनाथ बच्चों का सर्वे करने के तौर-तरीकों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सर्वे के दायरे में ऐसे अनाथ बच्चों को रखना है, जिनके माता-पिता का निधन हो चुका है तथा उनके अभिभावक देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं या तैयार नहीं हैं.

इसके अलावा, यदि कोई कानूनी अभिभावक (जिसे अदालत या कानून द्वारा नियुक्त किया गया हो) बच्चे की देखरेख कर रहा है, तो ऐसे बच्चों का भी सर्वे किया जाना है. सेविकाओं को निर्देश दिया गया कि वे परिवार, रिश्तेदारों, गोद लेने वाले माता-पिता और कानूनी अभिभावकों से संपर्क कर अनाथ बच्चों की सटीक जानकारी इकट्ठा करें और उसकी रिपोर्ट बाल विकास परियोजना कार्यालय में जमा करें.

सर्वे के उपरांत चिह्नित सभी अनाथ बच्चों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभांवित किया जायेगा. इस कार्यक्रम के दौरान बीडीओ सह प्रभारी सीडीपीओ विजय उरांव, एलएस तारामुनी देवी सहित काफी संख्या में आंगनबाड़ी सेविकाएं मौजूद थीं.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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