प्रतिनिधि, गुमला गुमला धर्मप्रांत के फादर सीप्रियन कुल्लू ने ईसाईयों के प्रमुख पवित्र माह चालीसा के तीसरे चिंतन पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि बाइबल के पुराने धर्मग्रंथ में ज़िक्र है कि दुनिया में इतनी बुराई बढ़ गयी है कि ईश्वर ने इसे नष्ट करने का निश्चय किया. सिर्फ़ नूह का परिवार जो ईश्वर भक्त था. उसे बचाना चाहा. ईश्वर ने नूह से कहा कि वह विशाल जहाज़ बनाये. जिसमें उसका परिवार और सभी जीवों के एक एक जोड़े रखे जाये. नूह ने ऐसा ही किया. नूह का परिवार और जीवों के एक एक जोड़े जहाज़ में रखे गये. ईश्वर ने 40 दिन और 40 रात जलप्रलय भेजा और धरती के सब प्राणी नष्ट हो गये जो जहाज़ में थे. वे बच गये. यहां से एक नयी सृष्टि की शुरुआत हुई. चैाथा चिंतन : इस्रायली जाति लगभग 430 वर्ष मिश्र देश में गुलाम थी. ईश्वर ने इनपर दया की. मूसा नबी के नेतृत्व में मिश्र देश से आजाद किया. फिर एक नये देश की ओर ले चला. इस्रायली चल पड़े और अंततः 40 वर्ष बाद अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए मंज़िल पहुंचे कनान. प्रतिज्ञात देश आज का इस्रायल देश पहुंचे और इसे अपना अलग स्वतंत्र राज्य बनाया. पांचवां चिंतन : नबी एलियस व नबी मूसा का चालीसा इन दोनों नबियों ने होरेब सिनई पर्वत पर 40 दिन की त्याग, तपस्या, उपवास व बिनती किया. 40 दिन बाद उन्हें दिव्य ज्ञान मिला. ईश्वर का दर्शन मिला और इन्हें बहुत बड़ा मिशन मिला कि ये ईश्वर की प्रजा का संचालन करें. छठवां चिंतन : ईसा मसीह ने भी अपना सुसमाचार प्रचार मिशन शुरू करने के पहले मरुभूमि में जाकर 40 दिन और 40 रात प्रार्थना और उपवास में बिताया. जहां उन्हें शैतान की कड़ी परीक्षा हुई. लेकिन 40 दिन की कठिन परीक्षा, उपवास और प्रार्थना के बाद वे नये मिशन, सुसमाचार प्रचार के मिशन की शुरूआत की. इसके बाद नाजरेत के अपने माता पिता परिवार सब छोड़ कर ईश्वर के राज्य विस्तार का प्रचार के जीवन की शुरूआत की. सातवां चिंतन : हम मानव जाति का भी चालीसा है. इस धरती में हम एक यात्री हैं. हमलोगों की यात्रा 40 दिन का नहीं जीवन भर का है. यहां चालीसा माने जीवनभर समझें. चालीसा तो एक प्रतीक है. जैसे उपर बताया गया कि चालीसा के तीन भाग है. शुरुआत, मध्य और अंत. जब हमने जन्म लिश हमारी चालीसा यात्रा शुरू हुई. वर्तमान में यात्रा जारी है और मरणोपरांत स्वर्ग में ईश्वर से मिलन हमारी चालीस यात्रा का अंतिम पड़ाव होगा. यात्रा में कठिनाइयां हैं. उतार चढ़ाव है. गिरना उठना है. पर चलते जाना है. अंतिम अंतिम मंज़िल पहुंचना है. जो अदभुत और सुखद है. आठवां चिंतन : चालीसा एक गर्मी मौसम की तरह है. गर्मी ऋतु में प्रकृति सूख जाती है. नदी नाले, घास फूस, पेड़ पौधे सब सूख जाते हैं. परंतु गर्मी ऋतु के बाद जब बरसात ऋतु आती है. प्रकृति बदल जाती है. सब तरफ़ हरियाली छा जाती है. वैसे ही चालीसा में मानव को त्याग तपस्या करना है. पश्चताप करना है. दान पुण्य करना है. ईश्वर की ओर लौटा आना है और चालीसा के अंत में ईस्टर त्योहार, आनंद और ख़ुशी का त्योहार मनाना है. ईस्टर त्योहार बरसा ऋतु की तरह है.
चालीसा पर विशेष : चालीसा में मनुष्य को त्याग व तपस्या करनी चाहिए : फादर सीप्रियन
गुमला धर्मप्रांत के फादर सीप्रियन कुल्लू ने ईसाईयों के प्रमुख पवित्र माह चालीसा के तीसरे चिंतन पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि बाइबल के पुराने धर्मग्रंथ में ज़िक्र है कि दुनिया में इतनी बुराई बढ़ गयी है कि ईश्वर ने इसे नष्ट करने का निश्चय किया.
