घाघरा (गुमला): घाघरा प्रखंड के मकरा गांव स्थित मॉडल विद्यालय और सॉलिटेयर एजुकेशन एकेडमी तक जाने वाली जर्जर सड़क अब विद्यार्थियों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बन गई है. घाघरा-गुमला मुख्य मार्ग से करीब एक किलोमीटर अंदर स्थित इन दोनों विद्यालयों में प्रतिदिन लगभग 800 से 900 विद्यार्थी पढ़ने आते हैं, लेकिन बरसात के मौसम में सड़क की बदहाल स्थिति के कारण विद्यालय पहुंचना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
कीचड़ और गड्ढों से रोज हो रही दुर्घटनाएं
सड़क पर जगह-जगह दो-दो फीट तक कीचड़ और गहरे गड्ढे हो जाने से विद्यार्थियों को पैदल आने-जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. आए दिन बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे उनके स्कूल ड्रेस, जूते, बैग, कॉपी-किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री खराब हो जाती है. लगातार हो रही इस परेशानी के कारण कई विद्यार्थियों ने विद्यालय आना भी बंद कर दिया है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
हर साल बनती है यही स्थिति
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान सड़क की स्थिति ऐसी ही हो जाती है, लेकिन अब तक प्रशासन या जनप्रतिनिधियों की ओर से स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है.
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वाहनों के परिचालन को लेकर होता है विवाद
खराब सड़क के कारण स्कूल वाहनों और अन्य वाहनों के परिचालन को लेकर कई बार ग्रामीण विरोध भी करते हैं. इससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और वाहनों का आवागमन बाधित हो जाता है.
पुलिस को भी करना पड़ता है हस्तक्षेप
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई बार घाघरा पुलिस को मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाना पड़ा है, जिसके बाद ही वाहनों का परिचालन शुरू हो सका.
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एक किलोमीटर सड़क बनने से मिलेगी राहत
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मात्र एक किलोमीटर सड़क का निर्माण करा दिया जाए तो सैकड़ों विद्यार्थियों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों को भी आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी.
बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा का मामला
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अविलंब सड़क निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा है कि यह केवल सड़क का मामला नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. समय रहते समाधान नहीं होने पर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका और अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
