फंड में करोड़ों रुपये होने के बावजूद खर्च नहीं के बराबर, पंचायतों का विकास ठप

गुमला में 15वें वित्त आयोग का करोड़ों का फंड होने के बावजूद विकास कार्य ठप हैं. तकनीकी पेंच के कारण लाभुक समितियों का भुगतान भी महीनों से लटका हुआ है.

जगरनाथ पासवान, गुमला

गुमला सदर प्रखंड अंतर्गत पंचायतों के विकास के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये दिये जाने के बावजूद पंचायतों में विकास कार्यों पर ग्रहण लगा हुआ है. प्राप्त आवंटन के विरूद्ध खर्च की स्थिति नगण्य और पंचायतों में विकास कार्य ठप है. इसके साथ ही लाभुक समितियां भी पंचायतों में कराये गये कुछ कार्यों के भुगतान के लिए आये दिन सदर प्रखंड कार्यालय गुमला का चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन तकनीकी पेंच में इनका भी भुगतान नहीं हो पा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार सदर प्रखंड के कुल 25 पंचायतों में विकास कार्यों के लिए सदर प्रखंड कार्यालय को विगत वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 15वें वित्त आयोग मद में 11 करोड़ 84 लाख 89 हजार 439 रुपये उपलब्ध कराया गया था.

अब विगत वित्तीय वर्ष 2025-26 के बाद इधर वित्तीय वर्ष 2026-27 का चौथा माह जुलाई चल रहा है. लेकिन अब तक सदर प्रखंड कार्यालय द्वारा प्राप्त आवंटन के विरूद्ध मात्र 14 प्रतिशत (एक करोड़ 67 लाख 65 हजार 697 रुपये) ही खर्च किया जा सका है, जबकि 86 प्रतिशत (10 करोड़ 17 लाख 23 हजार 742 रुपये) अभी भी फंड में ही पड़ा हुआ है.

अंबोवा पंचायत का 46,78,672 रुपये, आंजन का 37,76,592, अरमई का 39,92,351 रुपये, असनी का 23,47,768 रुपये, बसुआ का 33,36,633 रुपये, वृंदा का 33,25,109 रुपये, डुमरडीह का 30,39,186 रुपये, फसिया का 52,82,557 रुपये, फोरी का 34,98,024 रुपये, घटगांव का 32,00,668 रुपये, कलिगा का 45,98,302 रुपये, करौंदी का 39,29,112 रुपये, कसिरा का 52,53,181 रुपये, कतरी का 45,44,323 रुपये, खरका का 25,96,876 रुपये, खोरा का 61,05,850 रुपये, कोटाम का 37,68,037 रुपये, कुलाबिरा का 25,12,867 रुपये, कुम्हरिया का 40,92,620 रुपये, मुरकुंडा का 44,47,776 रुपये, नवाडीह का 33,47,456 रुपये, पुग्गू का 40,11,735 रुपये, सिलाफारी का 33,42,722 रुपये, तेलगांव का 47,34,542 रुपये व टोटो पंचायत का 79,60,783 रुपये फंड में उपलब्ध है.

15वें वित्त की योजनाओं में नहीं हो रहा भुगतान, लाभुक समितियां परेशान

पंचायतों में 15वें वित्त की योजनाओं में काम करने वाले लाभुक समितियों का राशि भुगतान विगत कई महीनों से लटका हुआ है. भुगतान का मामला तकनीकी पेंच में फंसे होने के कारण भुगतान पर ग्रहण लग गया है. नये नियम के तहत अब 15वें वित्त मद की राशि से योजनाओं संबंधी कार्यों के राशि भुगतान की प्रक्रिया में लाभुक समितियों से ई-चालान मांगा जा रहा है. लाभुक समिति योजना से संबंधित कई तरह के कागजात व फोटो तो उपलब्ध करा दे रहे हैं, लेकिन ई-परिवहन चालान समितियों के लिए जी का जंजाल बन गया है.

लाभुक समिति के लोगों का कहना है कि प्रशासन इसमें एक नियम को मान रही है, लेकिन उससे संबंधित दूसरे नियम को मानने से इंकार कर रही है. जिसका असर पंचायत के विकास पर पड़ रहा है. लाभुक समिति के लोगों का कहना है कि योजनाओं में उन्होंने जिस वाहन (ट्रैक्टर) का उपयोग किया है, उसका ई-परिवहन चालान भी मांगा जा रहा है. लेकिन वाहन मालिकों के पास ई-चालान नहीं होने के कारण मिल नहीं रहा है. लाभुक समितियों का कहना है कि विगत 27 अप्रैल 2026 में रॉयल्टी को लेकर नया नियम लाया गया कि सरकारी योजनाओं में उपयोग हो रहे पत्थर बोल्डर, पत्थर चिप्स, पत्थर डस्ट, बालू, मोरम, ईंट आदि की ढुलाई का वैद्य ई-परिवहन चालान हो.

बिना वैध ई-परिवहन चालान के उपरोक्त खनिजों की ढुलाई अवैध मानी जायेगी. इसके लिए ग्रामीण कार्य विभाग, झारखंड सरकार द्वारा पत्र जारी किया गया था. जिसके आलोक में गुमला जिला स्तर पर जिला खनन पदाधिकारी द्वारा भी पत्र जारी किया गया. जिसके बाद 15वें वित्त की मद से किये गये विकास योजनाओं के भुगतान में ई-परिवहन चालान भी मांगा जा रहा है. लाभुक समितियों का यह भी कहना है कि इसके बाद जून 2026 में के पहले सप्ताह में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा ई-परिवहन चालान संबंधित पत्र पुन: जारी किया गया है.

विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं में विभिन्न लघु खनिजों के रॉयल्टी जमा करने हेतु पूर्व में लागू व्यवस्था को यथावत रखा जाये. लेकिन सदर प्रखंड कार्यालय में राज्य स्तरीय आदेश की अवहेलना करते हुए भुगतान नहीं किया जा रहा है. लाभुक समितियों का कहना है कि सदर प्रखंड कार्यालय गुमला में अभी भी ई-परिवहन चालान के अभाव में करोड़ों रुपये का भुगतान लटका हुआ है. इस संबंध में संबंधित पदाधिकारी से भी बात की गयी. उन्होंने बताया कि जिला खनन कार्यालय द्वारा बिना ई-परिवहन चालान के भुगतान संबंधित किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं किया गया है. जिस कारण भुगतान नहीं हो पा रहा है.


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By Durjay paswan

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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