वृद्ध नाना के भरोसे गुजर रही मूकबधिर अनाथ रश्मि की जिंदगी, अभी तक नहीं बना दिव्यांग प्रमाण पत्र

गुमला की अनाथ और मूकबधिर बच्ची रश्मि अपने वृद्ध नाना के भरोसे है। सरकारी योजनाओं के लाभ और बेहतर भविष्य के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगाई गई है।

गुमला: जिले के प्रखंड अंतर्गत नवाडीह पंचायत के फट्ठी गांव की आठ वर्षीय अनाथ और मूकबधिर बच्ची रश्मि उरांव की जिंदगी इन दिनों अपने वृद्ध नाना घुड़वा उरांव के सहारे चल रही है. रश्मि की मां का निधन हो चुका है, जबकि उससे पहले ही उसके पिता दोनों को छोड़कर चले गये थे.

इसके बाद रश्मि की मां मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करती रही. रश्मि की मां लंबे समय से बीमार थी. आर्थिक तंगी के कारण वह अपना समुचित इलाज नहीं करा सकी.

अपनी बीमारी से ज्यादा उसे अपनी मूकबधिर बेटी के इलाज और भविष्य की चिंता थी. वह चाहती थी कि किसी तरह बेटी का इलाज हो सके, लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत हो गयी. मां के निधन के बाद रश्मि पूरी तरह अपने वृद्ध नाना के भरोसे रह गयी है.

दिव्यांग प्रमाण पत्र और आधार कार्ड अब तक नहीं बने

रश्मि न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती है. परिजनों के अनुसार उसकी मानसिक स्थिति भी सामान्य नहीं है. इसके बावजूद अब तक उसका दिव्यांग प्रमाण पत्र और आधार कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं बन सके हैं.

इन दस्तावेजों के अभाव में वह सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रही है. वृद्ध नाना घुड़वा उरांव ने प्रशासन और सरकार से रश्मि का दिव्यांग प्रमाण पत्र व आधार कार्ड शीघ्र बनवाने की मांग की है.

उन्होंने बच्ची का नामांकन किसी मूकबधिर विद्यालय में कराने की भी अपील की है, ताकि उसे शिक्षा और बेहतर भविष्य मिल सके. नाना का कहना है कि उनकी उम्र काफी हो चुकी है और उन्हें इस बात की चिंता सताती रहती है कि उनके बाद रश्मि की देखभाल कौन करेगा.

समाजसेवी ने प्रशासन से की हस्तक्षेप की मांग

समाजसेवी महेंद्र उरांव ने गुमला प्रशासन से अपील की है कि रश्मि उरांव को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़कर उसके पालन-पोषण, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाये. उनका कहना है कि समय रहते प्रशासनिक पहल होने से बच्ची का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है और उसे सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा.


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