गुमला. करम पर्व के उपलक्ष्य में शनिवार को कार्तिक उरांव महाविद्यालय परिसर में करम पूर्व संध्या समारोह आयोजित हुआ. विद्यार्थियों ने पारंपरिक लोकनृत्य व लोकगीतों के माध्यम से झारखंड की जनजातीय संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की. कुड़ुख व मुंडारी भाषा में पारंपरिक प्रार्थना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. प्रभारी प्राचार्य संजय कुमार का पौधा व शॉल भेंट कर स्वागत किया गया. स्वागत भाषण कुड़ुख विभागाध्यक्ष प्रेमचंद उरांव ने दिया.
करमा प्रकृति और मानव के रिश्ते का प्रतीक
प्रभारी प्राचार्य संजय कुमार ने कहा कि करमा महज पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के अटूट रिश्ते का प्रतीक है. पर्यावरणीय असंतुलन के दौर में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गयी है. विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भाषा, संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों से जोड़ना महाविद्यालय की प्राथमिकता है.
सामूहिक लोकगीत प्रतियोगिता में खड़िया विभाग प्रथम और नागपुरी विभाग द्वितीय रहा. सामूहिक लोकनृत्य में खड़िया विभाग सेमेस्टर-4 ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. दूसरे स्थान पर खड़िया विभाग सेमेस्टर-4 और तीसरे स्थान पर पीजी सेमेस्टर-4 कुड़ुख विभाग रहा. विजेताओं को प्रमाण पत्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया.
लोकनृत्य के निर्णायक डॉ. चंद्रकिशोर केरकेट्टा, डॉ. लक्ष्मण उरांव व अनुतलान मिंज तथा लोकगीत के निर्णायक डॉ. सोहन मुंडा, समीर बिलुंग व सरिता टोप्पो थे. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जी भवानी कुमार रजक ने किया. मंच संचालन शशि विनय भगत ने किया.
