गुमला. गुमला नगर परिषद बरसात में पूरी तरह से ढह गई है. जनता अपनी समस्याओं के साथ अकेली जी रही है. पदाधिकारी अपने दफ्तर से बाहर नहीं निकलते. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षद चुनाव जीतने के बाद सिर्फ नाली साफ कराने में लगे हैं. टूटी सड़क पर किसी का ध्यान नहीं जाता. नाली का पानी सड़क पर बह रहा है. लोग गंदे पानी में चलने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियां फैलने का डर बना रहता है. जैसे कि शांति नगर में, नालियों के किनारे उगे झाड़-फूंस से लोगों को सांप-बिच्छुओं का खतरा सता रहा है. सड़कों पर जल जमाव है. लोग गंदे पानी भरे रास्तों से होकर गुजरने को मजबूर हैं, जो एक दैनिक संघर्ष बन गया है. गंदे पानी के बीच सफर करने को मजबूर हैं.
गुमला शहर में 22 वार्ड हैं. सरकारी अधिकारियों के रहने वाले क्वार्टर के आसपास और सड़कें ही सिर्फ साफ-सुथरी नजर आती हैं. बाकी सभी मोहल्लों का हाल बेहाल है. कहीं भी ठीक से सफाई नहीं है. सड़क पर कीचड़ है. नाली का पानी बह रहा है. टूटी सड़क पर गाड़ियां फंस रही हैं. 15 दिन पहले जिन सड़कों की मौखिक रूप से नगर परिषद ने मरम्मत कराई थी, आज वह सड़क फिर से टूट गई. लाखों रुपये की सरकारी राशि टूटी सड़कों की मरम्मत में बर्बाद हो गई.
सात माह पहले नगर परिषद का चुनाव हुआ था, तब लोगों ने सोच-विचार कर ईमानदार और काम करने वाले प्रतिनिधि को चुना था. पर, सात महीने में ही चुनाव जीतकर आए प्रतिनिधियों के काम करने का तरीक़ा पता चल गया. दो महीने तक आपस में ही सभी अंदरूनी कलह के शिकार रहे. मामला सेटिंग-गेटिंग से खत्म हुआ तो सभी प्रतिनिधि जनता के बीच से गायब हो गए. एक काम से सभी प्रतिनिधि खुश हैं. जनता से वसूले गए राजस्व के पैसों से सभी प्रतिनिधियों के घरों के सामने उनके नाम का बोर्ड लग गया.
इससे सभी प्रतिनिधि खुश हैं और अपने वार्ड क्षेत्र में सीना ताने घूम रहे हैं. जबकि दूसरी तरफ जनता इस बरसात में सफाई, टूटी सड़क, नाली की समस्या, जल जमाव, कीचड़ से जूझ रही है. जनता उम्मीद कर रही है कि पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि जल्द ही जागेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे, जिससे गुमला शहर का भला हो सके.
