विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने कहा कि सरहुल आदिवासियों का पवित्र पर्व है. यह प्रेम व भाईचारगी के साथ रहने का संदेश देता है. वर्तमान समय में हम प्रकृति के साथ जितना अधिक सामंजस्य बनायेंगे, उतना ही हमारा विकास होगा. हम सभी को पर्व के अवसर पर प्रकृति के संतुलन को बनाये रखने के लिए संकल्प लेने की जरूरत है.
प्रकृति हमारी मां है : चमरा लिंडा : बिशुनपुर विधायक चमरा लिंडा ने कहा कि मैं धरती माता को नमन करता हूं. प्रकृति हमारी जननी है. एक वह मां है, जो हमें जन्म देती है, दूसरी प्रकृति मां है, जिसके कोख पर हम खेल कर बड़े होते हैं. हम आज के दिन प्रकृति को बचाने का संकल्प लें. प्रकृति है, तो हमारा जीवन है. हम प्रकृति के पुजारी हैं, इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है कि हमें इसे बचायें. उन्होंने कहा कि सरहुल हमें भाईचारगी का संदेश देता है. हम सब मिल जुल कर पर्व मनायें.
गुमला विकास के पथ बढ़े : शिवशंकर उरांव : गुमला विधायक शिवशंकर उरांव ने कहा कि आज प्रकृति पर्व सरहुल है. यह पर्व हमें आपसी प्रेम व भाईचारगी से रहने का संदेश देता है. आज के दिन हम सभी गुमला के विकास व खुशहाल बनाने का संकल्प लें. गुमला की जो परंपरा आपसी प्रेम का रहा है, वह बना रहे. धरती मां हमें अन्न जल देती है. प्रकृति से हमारा जीवन जुड़ा है. इसलिए हम इसका संरक्षण करें.पेड़ पौधा को हम बचाये : गीताश्री उरांव : पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि सरहुल प्रकृति पर्व है.
यह प्रकृति व मनुष्य के मिलन का पर्व है. प्रकृति नहीं होगी, तो मनुष्य का जीवन समाप्त हो जायेगा. हवा व पानी प्रकृति से जुड़ा है. हम अपने जीवन के लिए प्रकृति को बचायें. सरहुल के पर्व में हम संकल्प लें. पौधा लगायेंगे और उसका संरक्षण करेंगे.
सरहुल पर्व की महत्ता को समझें और प्रकृति संरक्षण पर ध्यान दें. पृथ्वी व सूर्य के विवाह का पर्व : अशोक : आदिवासी छात्र संघ के जिला अध्यक्ष अशोक कुमार भगत ने कहा कि सरहुल पर्व अर्थात यह नये जीवन की शुरुआत का पर्व है. उन्होंने सरहुल पर्व मनाने की कथा बतायी. उन्होंने कहा कि यह पृथ्वी व सूर्य के विवाह का पर्व है. इस पर्व की कहानी के पीछे प्रकृति का इतिहास जुड़ा है. सरहुल के बाद कई महत्वपूर्ण कार्य शुरू होते हैं.
