भाई, भाभी व पत्नी को भी माओवादियों ने लकड़ी से जम कर पीटा छोटा भाई बरतू ने भाग कर जान बचायी
गांव के लोग सहायता के लिए आगे नहीं आये
घरों का दरवाजा बंद कर दुबके रहे लोग
महिलाओं को भी लाठी-डंडे से मारा
गुमला : पारा शिक्षक संदीप कुमार यादव की हत्या में भाकपा माओवादी के एरिया कमांडर बीरबल उरांव व लजीम अंसारी के दस्ते का हाथ है. परिजनों ने दोनों नक्सलियों की पहचान भी की है. परिजनों ने बताया कि रविवार रात आठ बजे घर में चार नक्सली आये थे. सभी वरदी पहने थे और बड़ा हथियार टांगे हुए थे.
संदीप को घर से निकाल कर मारते- पीटते जंगल के रास्ते ले गये. जंगल के रास्ते करीब तीन किमी पैदल तक माओवादी चले और संदीप को भी चलवाया. इसके बाद जंगल व पहाड़ को पार कर ठाकुर झरिया के पास पहुंचे. जहां बीच सड़क पर माओवादियों ने संदीप को गोली मार दी. भाई जीतू यादव ने बताया कि जब माओवादी संदीप को ले जा रहे थे तो हमलोग बचाने के लिए गये. लेकिन माओवादियों का दिल नहीं पसीजा.
महिलाओं को भी लकड़ी के कठफारा से मारा है. मृतक की मां सुवास देवी ने कहा कि मोय उ बेरा दूसर दने रहोन. हल्ला सुनके आवेक बेरा देखलोन कि मोइर बेटा के नक्सली मइन मार थइन. सुवास ने बताया कि नक्सली मइन मोइर बेटा के रोटी भी खायेक नी देलेन. छोटा भाई बरतू यादव ने कहा कि जब नक्सली घर के सदस्यों को मार रहे थे, तो मैं जान बचाकर गांव की तरफ भागा. गांव वालों को हल्ला कर बुलाया. लेकिन कोई बचाने नहीं आया. बल्कि सभी घर का दरवाजा बंद कर दुबक गये. जब मैं वापस आया तो देखा कि नक्सली बाइक जलाने के बाद उसके भाई को उठा कर ले गये थे.
धटना के बाद दहशत में हैं लोग
एसपी व डीएसपी गांव पहुंच कर परिजनों से पूछताछ किये. गांव का कोई भी आगे नहीं आया. परिजनों ने घटना की पूरी जानकारी दी. करीब एक घंटा तक पुलिस गांव में रूकी. एसपी ने मृतक के भाई बरतू से पूछताछ की. गांव की भौगोलिक बनावट के बारे में भी जानकारी ली. इधर, घटना के बाद परिजन दहशत में हैं. गांव के लोग भी डरे हुए हैं. पुलिस पहुंची तो पूरे गांव में सन्नाटा था. सिर्फ परिजन व गिने-चुने गांव के लोग ही दिखे.
केश्वर यादव की भूमिका पर संदेह
परिजनों ने हेठजोरी गांव के केश्वर यादव का नाम बताया है. परिजनों को शक है कि संदीप की हत्या में केश्वर की भी भूमिका होगी. क्योंकि कुछ साल पहले जब माओवादी संदीप को घर से उठा कर ले गये थे, तो उस समय परिजनों ने केश्वर से जाकर गुहार लगायी थी तो केश्वर के कहने पर माओवादियों ने संदीप को छोड़ दिया था. रविवार रात भी जब संदीप को माओवादी उठा कर ले गये तो परिजनों ने केश्वर से गुहार लगायी. लेकिन इस बार केश्वर संदीप को बचाने के बजाये खुद घर से भाग गया. पुलिस केश्वर को खोज रही है.
