माओवादियों का फरमान, आठ माह से नहीं चल रहे हैं वाहन

बिशुनपुर प्रखंड के जमटी गांव के लोग जी रहे हैं दहशत में दुर्जय पासवान/बसंत गुमला : गुमला जिला के बिशुनपुर प्रखंड स्थित जमटी गांव में भाकपा माओवादी के फरमान के बाद आठ माह से वाहनों का परिचालन ठप है. वहीं जमटी व कुमाड़ी गांव के लोगों को जंगल से लकड़ी काटने व वनोत्पाद के उपयोग […]

बिशुनपुर प्रखंड के जमटी गांव के लोग जी रहे हैं दहशत में
दुर्जय पासवान/बसंत
गुमला : गुमला जिला के बिशुनपुर प्रखंड स्थित जमटी गांव में भाकपा माओवादी के फरमान के बाद आठ माह से वाहनों का परिचालन ठप है. वहीं जमटी व कुमाड़ी गांव के लोगों को जंगल से लकड़ी काटने व वनोत्पाद के उपयोग पर भी रोक लगा दिया गया है. माओवादियों ने जंगल में प्रवेश नहीं करने का फरमान जारी किया है. फरमान का उल्लंघन करनेवाले की हत्या (छह इंच छोटा) करने की धमकी दी गयी है. आठ माह से लोग दहशत में जी रहे हैं.
वनोत्पाद के उपयोग पर रोक लगाने से जमटी व कुमाड़ी गांव के करीब पांच सौ परिवार के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. आंवला, जिरहुल, फूल, महुआ का उपयोग ग्रामीण नहीं कर पा रहे हैं.
सीएस व डीजीपी बनालात गये थे
बीते 27 फरवरी को सीएस राजबाला वर्मा व डीजीपी डीके पांडेय बनालात गये थे. उस समय भी ग्रामीण बनालात से जमटी तक गाड़ी नहीं चलने की शिकायत लेकर अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे. लेकिन उन्हें अफसरों से मिलने का मौका नहीं मिला. इधर, अभी भी क्षेत्र में माओवादी के जुटे होने की सूचना है.
ये घटनाएं हो चुकी है
28 फरवरी 2016 : कमांडर नकुल यादव ने जमटी गांव में बैठक कर एक-एक बच्चे की मांग ग्रामीणों से की थी.
28-29 फरवरी व एक मार्च : बच्चे नहीं देने पर नकुल ने जमटी गांव को नजरबंद कर दिया था.
सात मार्च 2016 : जमटी व कटिया में नक्सलियों का फरमान : 250 रुपये दो, तब सूखी लकड़ी ले जाने देंगे.
21 मार्च 2016 : डीआइजी, एसपी व सीआरपीएफ ने जमटी गांव में घुसे 24 बच्चों को सुरक्षिwत निकाला.
29 मई 2016 : पुलिस ने रूद्र ऑपरेशन चलाया. बिशुनपुर के कुमाड़ी से नक्सलियों के दस्ते से दो बच्चों को मुक्त कराया.
कोट
छह किमी पैदल चलना पड़ रहा है
ग्रामीणों ने बताया कि वाहन नहीं चलने के कारण करीब छह किमी तक उन्हें पैदल चल कर बनालात तक जाना पड़ता है. इसके बाद गाड़ियां मिलती है. सबसे ज्यादा परेशानी बीमार लोगों को हो रही है. खटिया पर लादकर मरीज को छह किमी पैदल चलना पड़ रहा है. जंगल में जाने से मना करने के कारण जलावन के लिए लकड़ी नहीं मिल रही है. गोबर का गोइंठा का उपयोग जलावन के रूप में कर रहे हैं.
मुझे इस बात की जानकारी नहीं है. अगर ऐसी बात है, तो सुरक्षा मुहैया करा वाहनों को जमटी तक लाया जायेगा. वनोत्पाद का प्रयोग ग्रामीण करें. पुलिस इस क्षेत्र में लगातार अभियान चलायेगी.
चंदन कुमार झा, एसपी, गुमला

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