माओवादियों के भय से परिजनों ने वार्ड सदस्य का शव जलाया

परिजन परंपरा के अनुसार वार्ड सदस्य करमा उरांव के पार्थिव शरीर को दफनाना चाह रहे थे बिशुनपुर(गुमला) : गुमला के बिशुनपुर थाना क्षेत्र के कठठोकवा गांव के वार्ड सदस्य करमा उरांव के शव को परिजन व ग्रामीणों ने माओवादियों के भय से जला दिया. परिजन शव को परंपरा के अनुसार दफनाना चाह रहे थे. लेकिन […]

परिजन परंपरा के अनुसार वार्ड सदस्य करमा उरांव के पार्थिव शरीर को दफनाना चाह रहे थे
बिशुनपुर(गुमला) : गुमला के बिशुनपुर थाना क्षेत्र के कठठोकवा गांव के वार्ड सदस्य करमा उरांव के शव को परिजन व ग्रामीणों ने माओवादियों के भय से जला दिया. परिजन शव को परंपरा के अनुसार दफनाना चाह रहे थे. लेकिन माओवादी नहीं चाह रहे थे कि करमा उरांव का शव पुलिस के हाथ लगे, इसलिए जलवा दिया. पुलिस जब रविवार को गांव पहुंची, तो करमा का शव जल कर राख हो चुका था. घटना के 72 घंटे बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं करायी गयी है.
नक्सलियों ने पहले कहा, दफना दो, िफर कहा, जला दो : करमा की मौत के बाद परिजन शव को लेकर बिशुनपुर थाना आ रहे थे. नक्सलियों ने शव को थाना ले जाने से रोक दिया और कहा कि शव को दफना दें. फिर उन्होंने शव को जलाने का फरमान सुनाया.
दूसरे दिन पुलिस गांव से लौटी : घटना के 24 घंटे बाद एएसपी पवन कुमार सिंह, एसडीपीओ भूपेंद्र राउत, सीआरपीएफ के अधिकारी व जवान गांव पहुंचे. एएसपी की पहल पर ग्रामीणों ने पूरी घटना की जानकारी दी. पुलिस रविवार की सुबह घटनास्थल से बिशुनपुर लौटी.
हपाद गांव पत्नी को लाने जा रहे थे करमा, मिल गया दस्ता : शुक्रवार को वार्ड सदस्य करमा उरांव अपनी आंगनबाड़ी सेविका पत्नी को लाने हपाद गांव जा रहे थे. उन्हें रास्ते में माओवादी कमांडर मदन यादव का दस्ता मिल गया. करमा डर से लौटने लगा. इसी दाैरान माओवादियों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस का मुखबिर कह डंडे से पिटाई करने लगे. अधमरा होने के बाद उन्हें कठठोकवा गांव के समीप फेंक दिया, जहां उनकी मौत हो गयी. गाैरतलब हो कि करमा उरांव की पत्नी हपाद गांव के बच्चों को आधार कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित करने गयी थी.

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