दुर्जय पासवान
गुमला : ‘मां’ सुनने को तरस रही है वीणा देवी. 11 साल में कई बार उसने अपनी बेटी से मां कहने के लिए कहा, लेकिन मानसिक रूप से विक्षिप्त संगीता के मुंह से ‘मां’ शब्द नहीं निकला.
अब वीणा अपनी बेटी का इलाज कराने के लिए भटक रही है. एक साल की उम्र में ही संगीता का दिमाग काम बंद कर दिया. अब संगीता की उम्र 12 साल है. इनका घर पालकोट प्रखंड के ढोलबीर हर्राटोली गांव में है. वीणा के पति पंचु गोप पेशे से किसान हैं. लेकिन गरीबी के कारण इलाज कराने में असमर्थ हैं.
बुधवार को वीणा अपनी विक्षिप्त बेटी को लेकर गुमला स्थित सीडब्ल्यूसी कार्यालय पहुंची. साथ में सृजन फाउंडेशन चाइल्ड लाइन पालकोट के सूरज केशरी व बिंदेश्वर पासवान थे. ये लोग सीडब्ल्यूसी की चेयरमैन तागरेन पन्ना से भेंट कर संगीता की स्थिति की जानकारी देते हुए इलाज कराने की गुहार लगायी. चेयरमैन ने बताया कि गुमला सदर अस्पताल परिसर में रिनपास रांची के डॉक्टर शुक्रवार को बैठते हैं. वहां इलाज की व्यवस्था करायी जायेगी.
पिता खटिया पर, मां मजदूरी करती है
संगीता के पिता पंचु गोप कई वर्षो से खटिया पर पड़ा हुआ है. चल फिर नहीं सकता. उसके कमर में चोट लगने के बाद लोहे का रॉड लगा है. गरीबी में परिवार जी रहा है. मां वीणा देवी मजदूरी कर किसी प्रकार पति व पांच बच्चों की परवरिश कर रही है. चार बच्चे ठीक हैं, जो स्कूल जाते हैं. लेकिन वीणा की चिंता बेटी संगीता के प्रति ज्यादा है.
जन्म के समय ठीक थी संगीता
संगीता कुमारी जन्म के समय ठीक थी. एक साल की उम्र तक वह स्वस्थ रही. वीणा देवी ने बताया कि संगीता मां बोलती थी. लेकिन अचानक बीमार पड़ी. उसका इलाज कराया. दवा भी दी. लेकिन धीरे-धीरे उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया. अब 11 साल हो गये. मां सुनने का तरस रही हूं. कहा कि गरीब हैं. किसी प्रकार बेटी का इलाज हो जाये.
सृजन फाउंडेशन ने दिखायी सक्रियता
सृजन फाउंडेशन चाइल्ड लाइन पालकोट के सूरज केशरी व बिंदेश्वर पासवान को जब पता चला कि संगीता का दिमागी स्थिति खराब है तो ये लोग उसके गांव गये. परिजनों से भेट किये. स्थिति की जानकारी व गरीबी को देखते हुए संगीता व उसकी मां को गुमला लेकर आये. अब संगीता का इलाज शुक्रवार को रिनपास के डॉक्टर द्वारा किया जायेगा.
