गुमला : भाकपा माओवादी के प्रवक्ता गोपाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है. इसमें 12, 13 व 14 जून की माओवादी बंदी को बेबुनियाद, झूठ, फरजी व पुलिस-प्रशासन की साजिश बताया है. गोपाल ने कहा है कि इन तीन दिनों के लिए संगठन ने कोई बंदी नहीं बुलायी. उसने आरोप लगाया है कि यह बंद पुलिस ने बुलाया है. गोपाल का कहना है कि संगठन ने पलामू व गुमला की घटना को लेकर 23 जून को बिहार, झारखंड व छत्तीसगढ़ राज्य बंद बुलाया है.
बदला लेने की चेतावनी : विज्ञप्ति में गोपाल ने कहा है कि जेजेएमपी व टीपीसी से मिल कर पुलिस ने जिन घटनाओं को अंजाम दिया है, उसके खिलाफ पीएलजीए 16 से 23 जून को प्रतिरोध सप्ताह मनायेगा. उसने अपने पत्र में हाल में हुई इन घटनाओं का भी जिक्र किया है. पलामू घटना पर कहा है कि एक साजिश के तहत कॉमरेड आरके को बुलाया गया.
इसके बाद पुलिस व जेजेएमपी के लोग सभी को पकड़ लिये और फरजी मुठभेड़ में मार गिराये. उसने गुमला व पलामू की घटना का बदला लेने की चेतावनी दी है.
पलामू में मारे गये 12 में सात माओवादी : गोपाल द्वारा जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि पुलिस ने जेजेएमपी के साथ मिल कर जिन 12 लोगों को पकड़ कर मार दिया, उसमें सात माओवादी संगठन के थे. मारे गये पांच लोगों को उसने समर्थक बताया है. जिन्हें संगठन का आदमी बताया गया है, उनमें देवराज उर्फ डॉ आरके उर्फ अनुराग, एरिया सदस्य अमलेश यादव, पीएलजीए सदस्य उमेश खरवार, महेंद्र खरवार, सत्येंद्र परहिया, चरकू परहिया और बुधराम उरांव शामिल हैं.
मीडिया प्रायोजित है बंद : प्रधान
12 जून को मीडिया में बंद की खबर आने के बाद एडीजी (ऑपरेशन) एसएन प्रधान ने आशंका जताते हुए कहा था कि तीन दिवसीय बंद मीडिया में ही कार्यरत कतिपय बंधुओं ने ही बुला लिया. उन्होंने यह भी कहा था कि मीडिया के कई बंधु पुलिस के मामलों में खोजी और क्रांतिकारी पत्रकारिता में पारंगत हैं, वे कम से कम यह खोज कर निकालें कि तथाकथित तीन दिवसीय बंद मीडिया में कार्यरत किसी कतिपय बंधु ने तो नहीं बुला लिया.
.. तो किसने बुलाया था तीन दिन का बंद
11 जून को प्रभात खबर समेत अन्य मीडिया हाउस में फोन कर बताया गया था कि 12, 13 व 14 जून को माओवादियों ने झारखंड सहित पांच राज्यों में बंद का आह्वान किया है. फोन करनेवाले ने खुद को माओवादी का प्रवक्ता गोपाल बताया था. अब 13 जून को गुमला में गोपाल के नाम से प्रेस विज्ञप्ति जारी की गयी, इसमें 12, 13 व 14 जून के बंद को झूठा व बेबुनियाद बताया गया.
11 तारीख को किसने फोन कर बंद बुलाया था
माओवादियों ने 13 जून को विज्ञप्ति जारी की. पर सीनियर पुलिस अधिकारी ने व्हाट्सअप पर 11 जून की रात को ही संकेत दे दिये थे कि माओवादी ने 23 को बंद बुलाया है
जिस तरीके से टेलीफोन और विज्ञप्ति के माध्यम से बंद को लेक र कंफ्यूजन हुआ है, उसके आधार पर यह भी नहीं कहा जा सकता कि 13 जून को माओवादियों की ओर से जारी विज्ञप्ति की सत्यता क्या है
