गुमला में 1932 में मशाल जलाकर निकाला गया था रामनवमी जुलूस, तब होता था एक ही अखाड़ा, अब 28

दुर्जय पासवान, गुमला गुमला में 1932 से रामनवमी पर्व पर जुलूस निकाला जा रहा है. यानि की भारत के आजादी के पहले से गुमला में रामनवमी जुलूस निकल रहा है. रामनवमी पर्व की शुरुआत की कहानी भी ऐतिहासिक है. उस जमाने में गुमला छोटा कस्बा था. तलवार, लाठी, डंडा व भाला नहीं होता था. लकड़ी […]

दुर्जय पासवान, गुमला

गुमला में 1932 से रामनवमी पर्व पर जुलूस निकाला जा रहा है. यानि की भारत के आजादी के पहले से गुमला में रामनवमी जुलूस निकल रहा है. रामनवमी पर्व की शुरुआत की कहानी भी ऐतिहासिक है. उस जमाने में गुमला छोटा कस्बा था. तलवार, लाठी, डंडा व भाला नहीं होता था. लकड़ी का गदा बनाकर लोग निकलते थे. गदा से ही जुलूस में करतब दिखाया जाता था. हनुमान जी की जन्मस्थली होने के कारण अधिकांश लोग हनुमान की वेश में निकलते थे. बिजली नहीं थी. मशाल की रोशनी में जुलूस निकला जाता था.

खेल का प्रदर्शन पेट्रोमेक्स की रोशनी में होता था. अखाड़ा सजता था. उसमें पहलवान लड़ते थे. गदा से लड़ाई होती थी. अभी जिस प्रकार कई अखाड़ा हैं. उस समय एक अखाड़ा होता था. घाटो बगीचा स्थित मंदिर में उस समय अखाड़ा लगता था और आसपास के लोग जुटते थे. शुरुआत में स्वर्गीय टोहन बाबू, स्वर्गीय मथुरा प्रसाद सिन्हा, स्वर्गीय फतेहचंद मंत्री, स्वर्गीय छेदी केशरी, स्वर्गीय गयादत्त पांडेय, स्वर्गीय गंगा महाराज तिवारी, स्वर्गीय रघुवीर साहू ने गुमला में रामनवमी का जुलूस निकालने की परंपरा की शुरू की थी.

वहीं दलजीत गुप्ता, मंतु राम, महावीर राम खेल का प्रदर्शन किया करते थे. ये लोग उस समय के जाने माने खिलाड़ी थे. इसके बाद 1964 ईस्वी से गुमला में झांकी निकालने की परंपरा की शुरुआत हुई. झांकी निकालने में भी प्रतिस्पर्धा होती थी.

राममय हुआ गुमला, शनिवार को निकलेगा जुलूस

गुमला में निकलने वाले रामनवमी जुलूस की पूरी तैयारी हो गयी है. दिन के दो बजे से जुलूस निकलेगा. केंद्रीय महावीर मंडल गुमला के अध्यक्ष सत्यनारायण पटेल व सचिव शशि प्रिया बंटी ने कहा : जुलूस में 28 अखाड़ा भाग लेंगे. डिस्को डांस पर रोक है. साउंड सिस्टम में सिर्फ धार्मिक गाने बजेंगे. छह अखाड़ा द्वारा झांकी निकाला जा रहा है. जुलूस में अनुशासन व पूरी सावधानी से चलना है. रात 12 बजे जुलूस खत्म होगा. इधर, जिला प्रशासन ने भी जुलूस के मद्देनजर सुरक्षा व विधि व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया है. संवेदनशील स्थानों पर मजिस्ट्रेट व पुलिस बल तैनात रहेंगे. एसपी अंजनी कुमार झा ने सभी थाना प्रभारी को अलर्ट करते हुए विधि व्यवस्था पर कड़ी नजर रखने के लिए कहा है.

गुमला में रामनवमी जुलूस का रूट

सभी क्लब के लोग पहले टावर चौक के पास जुटेंगे. यहां से जुलूस प्रारंभ होगा, जो पालकोट रोड, स्टेट बैंक मोड़, घाटो बगीचा होते हुए सिसई रोड तालाब के पास निकलेगी. इसके बाद सिसई रोड से होते हुए टावर चौक, मेन रोड, महावीर चौक होते हुए लोहरदगा रोड में जुलूस प्रवेश करेगा. यहां से जुलूस थाना चौक से होते हुए पुन: टावर चौक के पास पहुंचकर संपन्न होगा.

केंद्रीय महावीर मंडल द्वारा जारी दिशा निर्देश

: जुलूस दिन के तीन बजे से टावर चौक से शुरू होगी. जो शहर में भ्रमण करेगा.

: जुलूस के आगे केंद्रीय महावीर मंडल का महावीरी झंडा व पदाधिकारी चलेंगे.

: जुलूस में हड़िया व दारू पीकर भाग नहीं लेंगे. पकड़े जाने पर कार्रवाई होगी.

: डिस्को डांस पर प्रतिबंध है. बजरंग बली व जय श्री राम के नारे लगेंगे.

: अस्त्र शस्त्र चालन के दौरान किसी के घायल होने पर पदाधिकारी देखेंगे.

: जुलूस कतारबद्ध चलेगा. अस्त्र शस्त्र चालन के दौरान सावधानी बरतना है.

: अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए इसबार सभी को पहचान पत्र दिया जायेगा.

यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे

रामनवमी पर्व के दिन जिला व पुलिस प्रशासन ने कुछ विशेष स्थानों को चिह्न्ति किया है. जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे. इनमें गुमला थाना के टावर चौक, सिसई रोड तालाब, सरना टोली, थाना रोड, पटेल चौक, करौंदी, करमटोली, टोटो, आंजन व बसुवा, पालकोट थाना के बघिमा व पालकोट बाजार, बसिया थाना के कोनबीर नवाटोली, बसिया बाईपास, लोंगा व नारेकेला, कामडारा थाना के बाकुटोली, मिशन चौक व ब्लॉक चौक, सिसई थाना के पिलखी मोड़, सोगड़ा, मस्जिद चौक व कुम्हार टोली, भरनो के बाजार, बरंदा, अस्पताल चौक, भगत मोड़ व डोंबा, डुमरी थाना के सिरमी, जैरागी, भिखमपुर व गोविंदपुर, चैनुपर थाना के मिशन चौक, बरवे, जमगाई व भट्ठाटोली, रायडीह के शंख मोड़, पतराटोली बाजार व अरंडा, बिशुनपुर के बनारी, बेती व बिशुनपुर बाजार और घाघरा थाना क्षेत्र के आदर, पतागाई, देवाकी, चुंदरी, गम्हरिया व चांदनी चौक है. इन स्थानों पर पुलिस पदाधिकारी, जवान व मजिस्ट्रेट रहेंगे.

बैगा, पहान व पुजार पहले पूजा करते हैं

गुमला से 21 किमी दूर आंजन गांव. यहां के लोग आज भी अपने आपको हनुमान का वंशज कहते हैं. आज जरूर आंजन गांव विकास की बाट जोह रहा है. लेकिन आज भी इस क्षेत्र के लोग अपने आपको भाग्यशाली मानते हैं कि उनका जन्म ऐसे गांव में हुआ है. जहां श्रीराम भक्त हनुमान का जन्म हुआ था. यही वजह है कि रामनवमी पर्व में यहां की पूजा पद्धति सभी से भिन्न होती है. पूर्वजों के जमाने से चली आ रही परंपरा के अनुसार गांव के बैगा, पहान व पुजार सबसे पहले पूजा करते हैं. गांव में एक अखाड़ा है. जहां महावीरी झंडा गाड़ा जाता है. जिस प्रकार हनुमान कमर में लंगोटा बांधते थे. उसी प्रकार बैगा, पहान व पुजार सफेद रंग के धोती पहनकर अखाड़ा में आते हैं. उनके ऊपर का शरीर पूरी तरह खुला रहता है.

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